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यूपी वालों के लिए खुशखबरी, अब बिना दफ्तरों के चक्कर काटे सीधे कैंप में बनेंगे राशन कार्ड और पेंशन

यूपी में 17 सितंबर से 'सेवा संकल्प अभियान' का आगाज होगा। 826 ब्लॉकों और 762 निकायों में 'सेवा सेतु' शिविर लगाकर वंचितों को सीधे योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

Published On: September 12, 2026 4:43 PM
UP Seva Sankalp Abhiyan

HIGHLIGHTS

  • शासन प्रमुख के 25 वर्ष पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान।
  • 826 ब्लॉकों और 762 नगर निकायों में वंचित पात्रों के लिए 'सेवा सेतु' शिविर लगेंगे।
  • काशी और बड़नगर के बीच 20 यात्राएं निकलेंगी, 10 नदियों का पवित्र जल भेजा जाएगा।
  • स्टार्टअप की संख्या 120 से बढ़कर 24 हजार पार, छात्रों के लिए इनोवेशन चैलेंज।

दून हॉराइज़न, लखनऊ (12 सितंबर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) मिलकर 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक प्रदेशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने जा रही है।

लखनऊ स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महीने भर चलने वाले वृहद अभियान की पूरी रूपरेखा पेश की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की यात्रा किसी पारिवारिक विरासत की मोहताज नहीं रही, बल्कि जनसेवा और कठोर परिश्रम की नींव पर टिकी है।

‘सेवा सेतु’: 826 विकासखंडों और 762 निकायों में ऑन-द-स्पॉट समाधान

अभियान का सबसे ठोस प्रशासनिक पहलू ‘सेवा सेतु’ शिविरों की स्थापना है। अक्सर देखा जाता है कि कागजी अड़चनों या जानकारी के अभाव में पात्र लोग योजनाओं से छूट जाते हैं। इसी खाई को पाटने के लिए 29-30 सितंबर से 10 अक्तूबर तक प्रदेश के सभी 826 विकासखंडों और 762 नगर निकायों में 6 से 7 दिनों के विशेष शिविर लगाए जाएंगे।

इन शिविरों में पेंशन, पक्के आवास, शौचालय, आयुष्मान कार्ड और नए राशन कार्ड के लिए मौके पर ही पंजीकरण (Registration) होगा। मुख्यमंत्री ने साफ हिदायत दी है कि आवेदन लेकर लोगों को टरकाया न जाए; पंजीकरण के 48 से 72 घंटों के भीतर भौतिक सत्यापन पूरा कर लाभार्थी को सीधे लाभ से जोड़ा जाए। जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।

20 यात्राएं और 10 नदियों का पवित्र संगम

सांस्कृतिक और जनसंवाद के स्तर पर यह अभियान गुजरात और उत्तर प्रदेश को सीधे जोड़ेगा। प्रधानमंत्री के जन्मस्थान बड़नगर और संसदीय क्षेत्र काशी के बीच कुल 20 यात्राएं निकाली जाएंगी। 10 यात्राएं बड़नगर से काशी पहुंचेंगी और 10 यात्राएं काशी से बड़नगर रवाना होंगी।

उत्तर प्रदेश की 10 प्रमुख नदियों का जल कलशों में भरकर गुजरात भेजा जाएगा, वहीं बड़नगर की धरा का जल काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेगा। 17 सितंबर से शुरू होकर 7 अक्तूबर तक चलने वाली इन यात्राओं के मार्ग पर प्रतिदिन चार स्थानों पर चौपालें लगेंगी, जहां स्थानीय जनता से सीधा संवाद स्थापित होगा। वहीं, 17 सितंबर को ‘सेवा दिवस’ पर प्रदेश की हर ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया जाएगा।

120 से 24 हजार स्टार्टअप का सफर

यह अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं को जोड़ने के लिए स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक तीन स्तरों पर निबंध, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। तकनीकी छात्रों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के युवाओं के लिए ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में महज 120 स्टार्टअप (Startups) काम कर रहे थे, जिनकी तादाद आज बढ़कर 24 हजार के पार पहुंच चुकी है।

प्रेस वार्ता के दौरान सीएम योगी ने विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ‘100 रुपये में से 15 रुपये पहुंचने’ वाले पुराने बयान को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन व्यवस्था की लाचारी को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और जनधन खातों ने पूरी तरह खत्म कर दिया है। आज दिल्ली से जारी पूरा पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचता है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र व राज्य की नीतियों से देश में 26 करोड़ और अकेले यूपी में 6 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।

25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती और 2 अक्टूबर को गांधी जयंती को भी इस अभियान के अलग-अलग चरणों से जोड़ते हुए पूरे प्रदेश में बूथ स्तर तक यह सेवा पर्व विस्तारित रहेगा।

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Shubham Kochhar

शुभम कोचर 'दून हॉराइज़न' के उत्तर प्रदेश ब्यूरो चीफ के रूप में देश के सबसे बड़े राज्य की राजनीतिक और सामाजिक नब्ज़ टटोलते हैं। यूपी की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, क्राइम और विकास कार्यों की ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें खासा अनुभव है। शुभम का उद्देश्य सिर्फ खबरें देना नहीं, बल्कि सरकारी दावों की जमीनी हकीकत की जांच (Fact-check) करना है। उनकी निष्पक्ष, बेबाक और शोध-आधारित लेखनी सत्ता और आम जनता के बीच एक मजबूत पुल का काम करती है, जो पाठकों के भरोसे (Trust) पर पूरी तरह खरी उतरती है।

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