देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर रविवार रात करीब 10 बजे रायवाला क्षेत्र के मोतीचूर फ्लाईओवर के पास एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। ऋषिकेश से हरिद्वार की ओर जा रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रही रोडवेज बस ने टक्कर मार दी। इसके बाद एक कार, एक ट्राला और एक अन्य कार भी अनियंत्रित होकर इन दुर्घटनाग्रस्त वाहनों से टकरा गए। लगातार हुई इस भिड़ंत के बाद वाहनों में भीषण आग लग गई।
आग की लपटों और धुएं के गुबार के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही रायवाला कोतवाली पुलिस और हरिद्वार, ऋषिकेश व लालतप्पड़ से फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने वाहनों में लगी आग पर काबू पाया।
बिजनौर लौट रहे परिवार की महिला की मौत
इस हादसे में झुलसने से कुसुम नामक एक महिला की मौत हो गई। मृतका का परिवार उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का रहने वाला है। हादसे में घायल हुए अन्य यात्रियों को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से हरिद्वार के मेला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कुसुम की मौत के बाद उनके तीन बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया है। परिजनों के अनुसार, मृतका के पति सचिन दोनों हाथों से दिव्यांग हैं और कोई भी काम करने में पूरी तरह से असमर्थ हैं।
झंडा जी मेले से लौट रहे थे श्रद्धालु
दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर-ट्रॉली में एक ही परिवार के 32 लोग सवार थे। ट्रैक्टर चालक लव कुश और यात्री रोहित ने बताया कि वे सभी देहरादून में ऐतिहासिक श्री झंडा जी मेले में मन्नत पूरी होने पर दर्शन करने गए थे। रविवार को दर्शन के बाद वे हरिद्वार में रात्रि विश्राम और सोमवार सुबह गंगा स्नान कर बिजनौर लौटने वाले थे।
चालक लव कुश के अनुसार, सड़क किनारे ट्रैक्टर रोकते समय एक बस ने पीछे से टक्कर मारी। इसके बाद लोग संभल पाते, उससे पहले ही एक ट्रक ने भी ट्रॉली को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के कारण हाईवे पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा, जिसे रात सवा बारह बजे पुलिस ने सुचारु कराया।
पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने परिवहन विभाग और उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोटर वाहन अधिनियम के तहत ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवारियों को ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद 32 यात्रियों से भरा यह वाहन बिना किसी रोक-टोक के दो जिलों की सीमा पार कर गया।
पुलिस और आरटीओ की ओर से रास्ते में कहीं भी इस ट्रैक्टर-ट्रॉली को नहीं रोका गया। यदि समय रहते नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाता, तो इस जानलेवा हादसे को टाला जा सकता था।










