देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में एलपीजी गैस की किल्लत और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे कठोर कदम उठाया है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी छापेमारी में अवैध सिलेंडर पकड़े जाते हैं, तो उसे सप्लाई करने वाली गैस एजेंसी के स्वामी को नामजद कर सीधे जेल भेजा जाए। प्रशासन ने अब गैस वितरण की पूरी कमान अपने हाथ में ले ली है।
ऋषिपर्णा सभागार में हुई हाई-लेवल बैठक में सामने आया कि जिले में करीब 94 हजार गैस सिलेंडरों का बैकलॉग चल रहा है। इसमें से 25 हजार ऐसी बुकिंग हैं जिन्हें सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी के दौरान मैनुअल रजिस्टर में दर्ज किया गया था।

डीएम ने तेल कंपनियों और एजेंसियों को आज शाम तक यह पूरा डेटा ऑनलाइन सॉफ्टवेयर पर अपडेट करने की डेडलाइन दी है। लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर लाइसेंस निरस्तीकरण की तलवार लटक रही है।
व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जिले की 70 गैस एजेंसियों पर क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) के अधिकारी तैनात किए गए हैं। अब उपभोक्ताओं को गैस केवल होम डिलीवरी के माध्यम से और अनिवार्य रूप से ओटीपी (OTP) आधारित वेरिफिकेशन के बाद ही मिलेगी। गोदामों या एजेंसियों से सीधे सिलेंडर बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि सड़कों पर लगने वाली भीड़ और अव्यवस्था को रोका जा सके।
प्रवर्तन की कार्रवाई के तहत अब तक प्रशासन ने 150 घरेलू, 139 व्यावसायिक और 7 छोटे सिलेंडर जब्त किए हैं। आज भी सहस्त्रधारा क्षेत्र के होटलों और ढाबों से 15 घरेलू सिलेंडर अवैध रूप से उपयोग किए जाते हुए पकड़े गए।

दिलचस्प तथ्य यह है कि होम डिलीवरी के दौरान 200 सिलेंडर वापस एजेंसी लौट आए क्योंकि घबराहट में उपभोक्ताओं ने पहले ही बुकिंग कर दी थी, जबकि उनके पास खाली सिलेंडर उपलब्ध नहीं थे।
शहर में गैस आपूर्ति की निगरानी के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 1077 और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 जारी किया है, जहां अब तक 35 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे 25 दिन (शहरी) और 45 दिन (ग्रामीण) की एडवांस बुकिंग की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करें ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जा सके।









