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उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारियों का बड़ा ऐलान, कल सड़कों पर उतरकर करेंगे विरोध

उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारियों ने सोने पर बढ़ी आयात शुल्क और सोना न खरीदने की अपील के विरोध में 14 मई को प्रदेशव्यापी सांकेतिक प्रदर्शन का निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में शाम के समय व्यापारी मोमबत्ती जलाकर अपनी मांगों के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।

उत्तराखंड के सर्राफा व्यापारियों का बड़ा ऐलान, कल सड़कों पर उतरकर करेंगे विरोध

HIGHLIGHTS

  • 14 मई को शाम 7 बजे देहरादून के धामावाला बाजार समेत पूरे प्रदेश में कैंडल मार्च।
  • सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6% से बढ़ाकर 15% करने का विरोध।
  • व्यापारियों का दावा: सोना न खरीदने की अपील से कारीगरों और छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट।

देहरादून, 13 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के सर्राफा कारोबारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री द्वारा की गई सोना न खरीदने की अपील के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

आगामी 14 मई को राज्यभर के ज्वेलर्स और स्वर्ण शिल्पकार शांतिपूर्ण ढंग से मोमबत्ती जलाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। यह निर्णय सोने पर बढ़ते आयात शुल्क और बाजार में छाई मंदी के कारण लिया गया है, जिससे इस उद्योग से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा होने की आशंका है।

देहरादून में शाम 7 बजे जुटेगा सर्राफा समाज

आंदोलन की रूपरेखा के अनुसार, राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक धामावाला स्थित सर्राफा बाजार में कल शाम 7 बजे भारी संख्या में व्यापारी एकत्र होंगे। इसी तर्ज पर हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी और उधमसिंह नगर समेत पर्वतीय जिलों के मुख्य बाजारों में भी सर्राफा एसोसिएशनों ने सांकेतिक प्रदर्शन की तैयारी पूरी कर ली है। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक पीड़ा को सरकार तक पहुंचाने का एक जरिया है।

आयात शुल्क और मंदी का दोहरा प्रहार

व्यापारिक संगठनों के अनुसार, केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 15 प्रतिशत कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से ही सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं, ऐसे में बढ़ी हुई ड्यूटी ने घरेलू बाजार में खरीदारी को लगभग ठप कर दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि जब देश के सर्वोच्च पद से नागरिकों को एक वर्ष तक सोना न खरीदने की सलाह दी जाती है, तो इसका मनोवैज्ञानिक असर ग्राहकों पर पड़ता है, जिससे बाजार में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

आजीविका और सांस्कृतिक परंपराओं पर संकट

सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चिंता जताई कि सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि भारतीय समाज में शादी-ब्याह और अक्षय तृतीया जैसे पर्वों का अभिन्न हिस्सा है। यदि मांग इसी तरह घटती रही, तो दुकानों पर काम करने वाले पारंपरिक कारीगरों और आभूषण निर्माताओं के पास काम नहीं बचेगा। व्यापारियों ने पूर्व के वर्षों के आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि जब भी नीतियों ने व्यापार को नुकसान पहुँचाया है, तब पूरे देश के सर्राफा समाज ने एकजुट होकर संघर्ष किया है।

उत्तराखंड सर्राफा बाजार की वर्तमान चुनौतियां

कारक वर्तमान स्थिति व्यापारियों पर प्रभाव
आयात शुल्क (Import Duty) 6% से बढ़कर 15% हुई गहनों की लागत में अत्यधिक वृद्धि।
बाजार मांग सरकारी अपील के बाद गिरावट छोटे और पारंपरिक ज्वेलर्स का व्यापार ठप।
स्थानीय रोजगार निर्माण कार्य में कमी स्वर्ण कारीगरों के पलायन का खतरा।
राजस्व बिक्री घटने से GST पर असर सरकार को मिलने वाले कर संग्रह में कमी।

व्यापारियों की मांग है कि सरकार आयात शुल्क पर तत्काल पुनर्विचार करे और ऐसे सार्वजनिक संदेश देने से बचे जिससे किसी विशेष उद्योग के प्रति नकारात्मक माहौल बने। प्रदेश के सर्राफा संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सांकेतिक विरोध के बाद भी सरकार ने उनकी समस्याओं का संज्ञान नहीं लिया, तो वे भविष्य में कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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