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देहरादून के डीएम ने पेश की मिसाल, विधवा महिला का बैंक कर्ज चुकाया और बेटियों की पढ़ाई का उठाया जिम्मा

देहरादून जिला प्रशासन ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए विधवा क्षमा परवीन का वर्षों पुराना बैंक कर्ज माफ कराकर उन्हें बड़ी राहत दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने न केवल कर्ज का निपटारा कराया, बल्कि उनकी बेटियों और नातिन की शिक्षा के लिए भी तत्काल व्यवस्था की।

देहरादून के डीएम ने पेश की मिसाल, विधवा महिला का बैंक कर्ज चुकाया और बेटियों की पढ़ाई का उठाया जिम्मा

HIGHLIGHTS

  • साल 2014 से लंबित डीसीबी बैंक का सवा लाख रुपये का ऋण पूरी तरह चुकता, डीएम ने जमा कराई शेष राशि।
  • 'नंदा-सुनंदा' प्रोजेक्ट के तहत बेटी फैजा की 27 हजार रुपये की स्कूल फीस भरी गई, मौके पर बना आय प्रमाण पत्र।
  • नातिन आयरा का आरटीई (RTE) के तहत निजी स्कूल में कराया गया दाखिला, प्रशासन बना बच्चों का सहारा।

देहरादून, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक टूट चुके परिवार को नई जिंदगी दे दी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक लाचार विधवा महिला, क्षमा परवीन के सिर से न केवल बैंक के कर्ज का बोझ उतारा, बल्कि उनकी बेटियों के भविष्य को भी सुरक्षित करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को झोंक दिया।

क्षमा परवीन की दास्तां दुखों के पहाड़ों से घिरी थी। साल 2014 में उन्होंने अपनी बड़ी बेटी के हाथ पीले करने के लिए डीसीबी बैंक से सवा लाख रुपये का कर्ज लिया था। नियति को कुछ और ही मंजूर था; उसी साल उनके पति का साया सिर से उठ गया।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार पर 2020 में कोविड महामारी ने दूसरा प्रहार किया, जब उनकी बड़ी विवाहित बेटी की भी मौत हो गई। अब क्षमा के कंधों पर तीन अविवाहित बेटियों, एक बेटे और अपनी मासूम नातिन की जिम्मेदारी आ गई।

हाल ही में 28 मार्च को क्षमा परवीन अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची थीं। उनकी आंखों में बेबसी और कर्ज का डर साफ झलक रहा था। डीएम सविन बंसल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल डीसीबी बैंक से संपर्क साधा।

बैंक के साथ समन्वय कर ऋण का ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) कराया गया। सेटलमेंट के बाद जो 33 हजार रुपये की राशि बकाया थी, उसे जिलाधिकारी ने स्वयं जमा करवाकर बैंक से ‘नो ड्यूज’ एनओसी (NOC) जारी करवाई।

प्रशासन की मदद कर्ज माफी तक ही सीमित नहीं रही। क्षमा की छोटी बेटी फैजा की पढ़ाई जो आर्थिक तंगी के कारण रुकने की कगार पर थी, उसे “नंदा-सुनंदा योजना” के जरिए पुनर्जीवित किया गया। डीएम के निर्देश पर प्रोजेक्ट से तत्काल 27 हजार रुपये की फीस जमा कराई गई।

यही नहीं, 5 वर्षीय नातिन आयरा को शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत पास के एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलाया गया। दाखिले की प्रक्रिया में आ रही आय प्रमाण पत्र की बाधा को मौके पर ही निस्तारित कर नया प्रमाण पत्र जारी किया गया।

देहरादून जिला प्रशासन की इस ‘रेस्क्यू टीम’ ने साबित कर दिया कि सरकारी तंत्र यदि संवेदनशील हो, तो किसी भी असहाय की दुनिया बदली जा सकती है। वर्तमान में क्षमा परवीन अपनी तीन कुंवारी बेटियों और नातिन के साथ राहत की सांस ले रही हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है और ऐसे मानवीय मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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