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देहरादून 9 जोन और 23 सेक्टरों में बंटा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कसी कमर

उत्तराखंड सरकार और एनडीएमए ने चारधाम यात्रा 2026 को सुरक्षित बनाने के लिए 'जीरो लॉस-ऑफ-लाइफ' का लक्ष्य निर्धारित करते हुए प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता जांचने के लिए आगामी 10 अप्रैल को राज्यभर के यात्रा मार्गों पर व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।

देहरादून 9 जोन और 23 सेक्टरों में बंटा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कसी कमर

HIGHLIGHTS

  • एनडीएमए और यूएसडीएमए की टेबल टॉप एक्सरसाइज में आपदा से निपटने के लिए जीआईएस मैपिंग और ड्रोन सर्वे पर जोर।
  • देहरादून जनपद को 9 जोन और 23 सेक्टरों में विभाजित कर मजिस्ट्रेटों और नोडल अधिकारियों की तैनातियां सुनिश्चित।
  • एनएचएआई और बीआरओ को संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में भारी मशीनरी और मैनपावर पहले से तैनात रखने के सख्त निर्देश।

देहरादून, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। हिमालय की गोद में बसने वाले चारों धामों की यात्रा को इस बार अभेद्य सुरक्षा घेरे में रखने के लिए उत्तराखंड प्रशासन ने आर-पार की रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने संयुक्त रूप से टेबल टॉप एक्सरसाइज कर यह साफ कर दिया कि इस साल ‘जीरो लॉस-ऑफ-लाइफ’ का संकल्प केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतरेगा।

प्रशासन का पूरा ध्यान उन आकस्मिक परिस्थितियों पर है जो अक्सर मानसून या खराब मौसम के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए काल बन जाती हैं। बैठक में यह तय हुआ कि 10 अप्रैल को एक विशाल मॉक ड्रिल आयोजित होगी, जो यह बताएगी कि आपदा के पहले 10 मिनट में एजेंसियां कितनी फुर्ती से रिएक्ट करती हैं।

विशेषज्ञों ने कड़े लहजे में कहा है कि यात्रा मार्गों के हर संवेदनशील मोड़ की जीआईएस मैपिंग अनिवार्य है। इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम के तहत इंसीडेंट कमांडर और सेक्टर मजिस्ट्रेटों को उनकी जिम्मेदारियों का नया चार्ट थमा दिया गया है। ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए हर उस पहाड़ी पर नजर रखी जाएगी जहां दरारें आने की संभावना है। हेली सेवाओं के लिए भी रियल-टाइम कोआर्डिनेशन चार्ट तैयार किया गया है।

सड़क मार्ग की चुनौती से निपटने के लिए NHAI, PWD और BRO को रेड अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील डेंजर जोन्स पर मशीनरी की तैनाती केवल कहने के लिए नहीं होगी, बल्कि ऑपरेटरों को ऑन-साइट मौजूद रहना होगा। सेना (Army), ITBP, NDRF और SDRF के साथ-साथ होमगार्ड और स्थानीय QRT की टुकड़ियों को एकीकृत कमांड सेंटर से जोड़ा गया है।

चारधाम के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं के दौरान ‘पैनिक कंट्रोल’ सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि आपदा के समय केवल बचाव ही नहीं, बल्कि फंसे हुए लोगों तक भोजन, संचार और तत्काल चिकित्सा पहुंचनी चाहिए।

देहरादून के अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा ने बताया कि जिलाधिकारी सविन बंसल के ब्लूप्रिंट के अनुसार जिले को 9 जोन और 23 सेक्टरों में बांट दिया गया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण से लेकर पार्किंग, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं तक का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है ताकि कहीं भी भीड़ का दबाव एक साथ न बने।

होटल व्यवस्था और खाद्य सामग्री के दामों पर भी इस बार प्रशासन की टेढ़ी नजर है। शिकायत निवारण तंत्र को इतना मजबूत किया गया है कि यात्री मौके से ही अपनी फीडबैक दे सकेंगे। इस हाई-लेवल बैठक में एसडीएम कुमकुम जोशी, योगेश मेहरा समेत पुलिस और राजस्व के तमाम दिग्गज शामिल रहे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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