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केंद्र से मिला ₹200 करोड़ का इनाम, खनन राजस्व में उत्तराखंड ने देश में हासिल किया दूसरा स्थान

उत्तराखंड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹1217 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ खनन राजस्व एकत्र कर अपने निर्धारित लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है। बेहतर तकनीक और पारदर्शी आवंटन के चलते विभाग ने लगातार दूसरे साल नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई है।

केंद्र से मिला ₹200 करोड़ का इनाम, खनन राजस्व में उत्तराखंड ने देश में हासिल किया दूसरा स्थान

HIGHLIGHTS

  • ₹950 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1217 करोड़ की भारी-भरकम कमाई।
  • केंद्र सरकार की ओर से खान मंत्रालय ने राज्य को ₹200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि दी।
  • मैदानी जिलों में 45 चेक गेट्स और ई-रवन्ना सिस्टम ने बदली खनन की सूरत।

देहरादून, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड सरकार के खनन विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तय किए गए सभी राजस्व रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्रदेश ने इस साल कुल 1217 करोड़ रुपये का खनन राजस्व प्राप्त किया है, जो निर्धारित लक्ष्य से लगभग 28 प्रतिशत अधिक है। राजस्व का यह आंकड़ा न केवल विभाग की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है, बल्कि लगातार दूसरे साल लक्ष्य से आगे निकलने की उपलब्धि भी है।

निदेशक-भूतत्व एवं खनिकर्म, राजपाल लेघा ने वित्तीय आंकड़ों का ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि विभाग के लिए वर्ष 2025-26 का लक्ष्य 950 करोड़ रुपये रखा गया था। इसके मुकाबले हुई 1217 करोड़ रुपये की कुल प्राप्ति में से 1130 करोड़ रुपये सीधे सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में जमा हुए हैं। इसके अतिरिक्त 80 करोड़ रुपये जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (DMF) और सात करोड़ रुपये राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (SMET) के खाते में गए हैं।

यह लगातार दूसरा अवसर है जब विभाग ने अपनी परफॉरमेंस से सबको चौंकाया है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सामने 1041 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। इस बार राजस्व वृद्धि का ग्राफ और भी ऊंचा रहा है।

उत्तराखंड के इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है, जहां 28 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में खान मंत्रालय ने उत्तराखंड को सीएम श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान देकर नवाजा है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को 200 करोड़ रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि (Incentive) भी प्रदान की है।

विभाग की इस भारी सफलता के पीछे ‘माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम’ और ‘ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर प्रोजेक्ट’ जैसी आधुनिक तकनीक का बड़ा हाथ है। विशेष रूप से राज्य के चार प्रमुख मैदानी जिलों में 45 हाई-टेक चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इन गेट्स की मदद से अवैध खनन और गैर-कानूनी परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

विशेष सिक्योरिटी फीचर्स वाले ई-रवन्ना प्रपत्रों के कारण फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो गई है, जिससे राजस्व की लीकेज पूरी तरह बंद हुई है।

प्रशासनिक स्तर पर खनिज नीति और नियमावली को सरल बनाना राज्य के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ है। राजपाल लेघा के अनुसार, नियमों के सरलीकरण से जहां एक ओर पारदर्शी तरीके से पट्टों का आवंटन संभव हुआ, वहीं दूसरी ओर वैध खनन को प्रोत्साहन मिला। वर्तमान में सख्त भंडारण नियमों और परिवहन जांच के कारण ही विभाग अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ने में सफल रहा है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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