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उत्तराखंड के किसानों की चमकेगी किस्मत, ITBP खरीदेगी करोड़ों के फल और सब्जियां

उत्तराखंड सरकार और ITBP के बीच हुए नए समझौते से सीमांत क्षेत्रों के किसानों को अब अपनी उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस करार के तहत राज्य में तैनात जवानों को सीधे स्थानीय खेतों से ताजे फल और सब्जियां मुहैया कराई जाएंगी।

उत्तराखंड के किसानों की चमकेगी किस्मत, ITBP खरीदेगी करोड़ों के फल और सब्जियां

HIGHLIGHTS

  • आईटीबीपी अब तक ₹14.77 करोड़ के स्थानीय उत्पाद खरीद चुका है।
  • सालाना मांग का 25% स्थानीय स्तर से लेने पर किसानों को ₹6 करोड़ का सीधा लाभ होगा।
  • चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और देहरादून के किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार।

देहरादून, 01 अप्रैल (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के सरहदी इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए बुधवार का दिन नई उम्मीदें लेकर आया। मुख्यमंत्री आवास में ‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के तहत एक अहम समझौते पर मुहर लगी है।

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अब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की उत्तराखंड में तैनात वाहिनियों को स्थानीय खेतों में उगे ताजे फल और सब्जियां परोसी जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में उत्तराखंड औद्यानिक परिषद और ITBP के बीच यह ऐतिहासिक MoU साइन हुआ।

इस समझौते का सीधा असर राज्य के उन मेहनतकश किसानों पर पड़ेगा जो दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अपनी उपज को बड़े बाजारों तक नहीं पहुंचा पाते थे। मुख्यमंत्री धामी ने साफ तौर पर कहा कि यह कदम न केवल हमारे जवानों को ‘केमिकल मुक्त’ और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करेगा, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने का काम भी करेगा।

करोड़ों का कारोबार और किसानों की सीधी पहुंच

आंकड़ों की बात करें तो यह केवल कागजी समझौता नहीं है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत आईटीबीपी ने अब तक ₹14 करोड़ 77 लाख की खरीदारी स्थानीय स्तर पर की है। योजना यह है कि अगर आईटीबीपी अपनी वार्षिक जरूरत का महज 25 प्रतिशत हिस्सा भी स्थानीय स्तर से उठाता है, तो राज्य के खजाने में नहीं, बल्कि सीधे किसानों की जेब में ₹6 करोड़ सालाना जाएंगे।

यह सप्लाई चेन चमोली के ऊंचे बुग्यालों से लेकर उत्तरकाशी के सेब के बागानों और पिथौरागढ़-चंपावत के सुदूर गांवों तक फैली होगी। इसके अलावा देहरादून के आसपास के इलाकों से भी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे बिचौलियों का तंत्र खत्म होगा और किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब हक मिल सकेगा।

‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के साथ जुड़ेगा विकास का पहिया

दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड सरकार केवल आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी ITBP के साथ कदमताल कर रही है। हाल ही में ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ (Healthy Border Campaign) के तहत राज्य के 108 सीमावर्ती गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए भी करार किया गया है। इसका मतलब यह है कि जहां एक तरफ जवान किसानों के उत्पाद खरीदेंगे, वहीं दूसरी तरफ ITBP के विशेषज्ञ डॉक्टर इन दुर्गम गांवों में टेलीमेडिसिन और इमरजेंसी सपोर्ट प्रदान करेंगे।

रिवर्स माइग्रेशन को मिलेगी ताकत

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार “लोकल फॉर वोकल” के संकल्प को धरातल पर उतार रही है। जब किसानों को अपने घर के पास ही स्थायी बाजार मिलेगा, तो पहाड़ों से होने वाला पलायन रुकेगा।

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आईटीबीपी के महानिरीक्षक (IG) मनु महाराज और कृषि मंत्री गणेश जोशी की मौजूदगी में हुए इस करार को रणनीतिक और सामाजिक, दोनों नजरिए से गेम-चेंजर माना जा रहा है। सीमा पर तैनात प्रहरियों को अब ‘घर जैसा’ ताजा खाना मिलेगा, जो कठिन ड्यूटी के दौरान उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाएगा।

इस मौके पर सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव और उद्यान निदेशक एस.एल. सेमवाल सहित सेना और प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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