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उत्तराखंड में ‘सिनेमन वैली’ से बदलेगी किसानों की किस्मत, चंपावत और नैनीताल के लिए बड़ा प्लान तैयार

उत्तराखंड के चम्पावत और नैनीताल जिलों में करीब 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में 'सिनेमन वैली' (दालचीनी घाटी) विकसित की जा रही है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सेलाकुई में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में इसकी जानकारी देते हुए अधिकारियों को दुर्गम क्षेत्रों में वन विभाग के साथ मिलकर सगंध खेती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में 'सिनेमन वैली' से बदलेगी किसानों की किस्मत, चंपावत और नैनीताल के लिए बड़ा प्लान तैयार

HIGHLIGHTS

  • चम्पावत और नैनीताल के 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगी देश की अनूठी 'सिनेमन वैली'।
  • महक क्रांति नीति 2026 के तहत राज्य के 91 हजार किसानों को सगंध खेती से जोड़ने का लक्ष्य।
  • सेलाकुई CAP में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञ शामिल।
  • वन भूमि और पहाड़ों के दुर्गम इलाकों में सगंध पौधों की खेती के लिए बनेगा नया वर्क प्लान।

देहरादून, 11 जून (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड को देश का बड़ा एरोमा हब बनाने और दालचीनी की व्यावसायिक खेती को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने जमीनी कसरत तेज कर दी है।

इसके तहत नैनीताल और चम्पावत जिलों में लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए ‘सिनेमन वैली’ विकसित की जा रही है। यह जानकारी प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने गुरुवार को सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (कैप) में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान साझा की।

कृषि मंत्री ने सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में “दालचीनी: प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” विषय पर आधारित कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन किया। इस मौके पर कार्यक्रम की विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया गया। सेमिनार में वैश्विक स्तर पर दालचीनी उत्पादन के लिए मशहूर श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देशों के कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और उद्यमी शिरकत कर रहे हैं।

महक क्रांति नीति से जुड़ेंगे 91 हजार किसान

खेती-किसानी को रोजगारपरक बनाने के विभागीय रोडमैप का जिक्र करते हुए कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने राज्य में ‘महक क्रांति नीति 2026’ लागू की है। इस नीति का सीधा उद्देश्य सूबे के 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सगंध खेती के दायरे में लाना है। सरकार का दावा है कि इस मुहिम से आने वाले समय में उत्तराखंड के 91 हजार किसान परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिलेगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि सगंध पौधा केंद्र (CAP) बीते दो दशकों से राज्य के किसानों के बीच नई तकनीक पहुंचाने का काम कर रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार दालचीनी की उन्नत किस्मों की खोज, बेहतर प्रसंस्करण (प्रॉसेसिंग) और अंतरराष्ट्रीय विपणन (मार्केटिंग) के नेटवर्क को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।

दुर्गम इलाकों और फॉरेस्ट लैंड के इस्तेमाल पर जोर

पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन रोकने और बंजर जमीनों के उपयोग को लेकर कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी वन विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें, ताकि राज्य के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और फॉरेस्ट लैंड (वन भूमि) पर औषधीय व सगंध पौधों की खेती का विस्तार किया जा सके। इससे स्थानीय स्तर पर न केवल रोजगार पैदा होगा, बल्कि किसानों को पारंपरिक खेती के विकल्प के रूप में एक मजबूत आय का जरिया मिलेगा।

इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को सम्मानित करने के साथ ही कृषि मंत्री ने संस्थान परिसर में औषधीय व सगंध पौधों से बने उत्पादों के विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण भी किया।

कार्यक्रम के दौरान राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की उपाध्यक्ष सोना सजवाण, कृषि सचिव डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डे, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, कैप के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान और फफाई के अध्यक्ष योगेश दूबे समेत कई देशों के शोधकर्ता और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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