नई दिल्ली, 22 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Cockroach Janata Party : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर चुका है। आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के साथ किसी भी बंद कमरे की वार्ता में शामिल होने से सीधे तौर पर इनकार कर दिया है।
संसद मार्च के दौरान हुए भारी बवाल और लाठीचार्ज के दो दिन बाद 30 वर्षीय सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि सरकार को अपने पद का अहंकार छोड़ना होगा। अगर केंद्रीय नेतृत्व वार्ता में सचमुच गंभीर है तो उन्हें जंतर-मंतर पर आकर सीधे छात्रों के बीच बात रखनी होगी।
पिछले दो महीने से चल रहे इस अनोखे व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन के तेवर अब पूरी तरह सख्त हो चुके हैं। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि प्रतिनिधिमंडल अब किसी मंत्री या नेता के दफ्तर का चक्कर नहीं लगाएगा।
वार्ता केवल जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल वेन्यू पर ही संभव है। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हमारी पहली और अंतिम शर्त है, जिससे पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा द्वारा भेजे गए बातचीत के नए न्योते को सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया। दास ने बताया कि पिछले संवाद के नाम पर केवल समय की बर्बादी की गई थी।

अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को चार घंटे तक इंतजार कराया, जबकि छात्रों के समय की अपनी कीमत है। जब तक सरकार मांगें पूरी करने का लिखित आश्वासन नहीं देती, उनके आवास या दफ्तर जाने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
दूसरी तरफ सरकारी सूत्रों का दावा है कि शासन की तरफ से संवाद का रास्ता पूरी तरह खुला रखा गया है। अगर प्रदर्शनकारी प्रतिनिधि बातचीत की मेज पर आते हैं तो सरकार किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार है।
तमाम गतिरोध और तनातनी के बीच बुधवार दोपहर के आसपास दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की अनौपचारिक वार्ता आयोजित होने के संकेत भी मिल रहे हैं।
अभिजीत दीपके ने शासन की नीयत पर सीधे सवाल खड़े करते हुए दोहरे रवैये का आरोप लगाया। एक तरफ सरकार बातचीत की मेज सजाने का दिखावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर उतरे निर्दोष छात्रों पर पुलिस की लाठियां भांजी जा रही हैं।
जंतर-मंतर के मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए दीपके ने सोमवार को घटी घटना की पूरी क्रोनोलॉजी सामने रखी। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के बहाने उनके प्रतिनिधियों को मानसिक रूप से दबाव में लाने की कोशिश की गई।
बातचीत के लिए बुलाए गए प्रतिनिधियों के मोबाइल फोन गेट पर ही जमा करा लिए गए थे। इसके बाद सीजेपी प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरव दास को जेपी नड्डा के आवास के भीतर लगभग 5 घंटे तक बंधक जैसी स्थिति में रखा गया।
दीपके के मुताबिक, यह पूरी रणनीति जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र टीम को तितर-बितर करने के लिए रची गई थी। जब पुलिस संसद मार्च पर आंसू गैस के गोले छोड़ रही थी, उस वक्त नेतृत्व करने वाले नेताओं को बातचीत के नाम पर नजरबंद रखा गया था।
इन बेहद गंभीर और संगीन आरोपों पर फिलहाल केंद्र सरकार या बीजेपी संगठन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इससे पहले सोमवार को हुई शुरुआती मुलाकात में जेपी नड्डा ने मांगों पर आंतरिक समीक्षा का आश्वासन दिया था। हालांकि उसी दौरान बाहर सड़कों पर पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली थी।
संसद भवन की ओर बढ़ रहे हजारों युवाओं को रोकने के लिए पुलिस ने कई दौर का लाठीचार्ज किया था और भारी तादाद में आंसू गैस के गोले दागे थे।
इस घटना के बाद जंतर-मंतर को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कड़ी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के बीच आज आंदोलन अपने 32वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जहां दोनों ही पक्ष सोमवार को हुई हिंसा का ठीकरा एक-दूसरे के सिर फोड़ रहे हैं।














