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KBC लॉटरी के नाम पर रुद्रप्रयाग में 1.5 करोड़ की ठगी, साइबर पुलिस में केस दर्ज

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में फेसबुक पर KBC 'चेहरा पहचानो' गेम खेलने के फेर में एक शख्स ने 1.5 करोड़ रुपये गंवा दिए। ठगों ने 57 बार में यह रकम ट्रांसफर कराई। पढ़ें पूरा मामला।

Published On: September 23, 2026 6:26 PM
KBC Cyber Fraud Rudraprayag

HIGHLIGHTS

  • फेसबुक पर 'चेहरा पहचानो' गेम में 8.5 लाख जीतने का झांसा मिला था।
  • पीड़ित ने 8 महीने में 57 अलग-अलग किश्तों में कुल 1.5 करोड़ रुपये गंवाए।
  • रकम जुटाने के लिए बैंकों से भारी कर्ज लिया और रिश्तेदारों से लाखों रुपये उधार मांगे।
  • पहली बार महज 1550 रुपये के कथित टैक्स भुगतान से शुरू हुआ था ठगी का सिलसिला।
  • साइबर अपराध थाना पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : सोशल मीडिया पर आसान कमाई और लॉटरी का लालच पहाड़ के सीधे-सादे लोगों की जिंदगी भर की कमाई निगल रहा है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में साइबर अपराध (Cyber Crime) का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।

यहां उखीमठ तहसील क्षेत्र स्थित किणझाणी गांव के रहने वाले 54 वर्षीय कमल सिंह साइबर शातिरों के ऐसे चंगुल में फंसे कि उन्होंने एक-दो बार नहीं, बल्कि कुल 57 बार में अपनी डेढ़ करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई लुटा दी। हैरानी की बात यह है कि ठगों को देने के लिए उन्होंने बैंकों से कर्ज उठाया और रिश्तेदारों तक से लाखों रुपये उधार ले लिए।

फेसबुक पर ‘चेहरा पहचानो’ गेम से शुरू हुआ जाल

मामले की शुरुआत इसी साल 14 जनवरी को हुई थी। कमल सिंह फेसबुक स्क्रॉल करते हुए कौन बनेगा करोड़पति के नाम से चल रहे ‘चेहरा पहचानो’ गेम से जुड़े। दावा किया गया था कि सही चेहरा पहचानने पर 8.5 लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। उन्होंने खेल में हिस्सा लिया और कुछ ही देर में उनके पास जीत का मैसेज आ गया।

इसके फौरन बाद नितिन नाम के एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर उनसे संपर्क साधा। उसने खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताते हुए दावा किया कि इनाम की राशि रिलीज कराने के लिए महज 1550 रुपये का टैक्स जमा करना होगा। यह पहली रकम ट्रांसफर होते ही ठगों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया।

लग्जरी कार और करोड़ों की लॉटरी का दिया झांसा

पहली रकम मिलने के बाद शातिरों ने कमल सिंह को बताया कि वे एक विशेष लकी ड्रॉ के तहत कई करोड़ रुपये और एक महंगी चार पहिया गाड़ी जीत चुके हैं। इसके बाद अलग-अलग प्रोसेसिंग फीस, आरबीआई क्लीयरेंस, जीएसटी और इंश्योरेंस चार्ज के फर्जी दस्तावेज दिखाकर उनसे पैसे ऐंठे जाने लगे।

आंखों पर लालच की ऐसी पट्टी बंधी कि वे लगातार पैसे ट्रांसफर करते चले गए। अपनी जमा पूंजी खत्म हुई तो उन्होंने विभिन्न बैंकों से लोन लिया और परिचितों के आगे हाथ फैलाए। यह सिलसिला जनवरी से लेकर 16 सितंबर तक बेरोकटोक चला। जब 16 सितंबर को आखिरी ट्रांजैक्शन के बाद भी नए चार्ज की मांग हुई, तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा खेल हो चुका है।

साइबर अपराध थाने में मुकदमा दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

ठगी की भयावहता समझ आते ही पीड़ित ने देहरादून स्थित स्पेशल साइबर अपराध थाने की शरण ली। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल शुरू कर दी है।

साइबर अपराध थाने के प्रभारी निरीक्षक त्रिभुवन रौतेला के मुताबिक, पीड़ित की विस्तृत तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जिन 57 खातों में ट्रांजैक्शन हुए हैं, उनका डिजिटल ट्रेल खंगाला जा रहा है।

उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) लगातार चेतावनी जारी करती रही है कि लॉटरी, कौन बनेगा करोड़पति या किसी सेलिब्रिटी के नाम पर आने वाले फर्जी व्हाट्सएप मैसेज और कॉल्स पर कतई भरोसा न करें। यदि किसी भी नागरिक के साथ ऐसी धोखाधड़ी होती है, तो तत्काल नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर (Cyber Helpline) 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि प्राथमिक घंटों (Golden Hours) में बैंक खातों को फ्रीज कराया जा सके।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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