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देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान अलर्ट, मंडरा रहा खतरा

देहरादून के जौलीग्रांट और अमृतसर एयरपोर्ट पर बर्ड स्ट्राइक का खतरा गहरा गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के शोध में चील-कबूतर समेत 21 प्रजातियों को हाई रिस्क घोषित किया गया है।

Published On: September 23, 2026 6:38 PM
Jolly Grant Airport Bird Strike

HIGHLIGHTS

  • जौलीग्रांट में 13 और अमृतसर में 8 पक्षी प्रजातियां विमानों के लिए अति संवेदनशील हैं।
  • देहरादून हवाई क्षेत्र में दर्ज 57 में से टिटहरी, चील और कबूतर सर्वाधिक जोखिम वाले पाए गए।
  • पक्षी दिखने के कारण पूर्व में जौलीग्रांट में विमान को आसमान में चक्कर काटना पड़ा था।
  • रनवे परिधि में सियार, साही और खरगोश की मौजूदगी ने जमीनी सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।

दून हॉराइज़न, देहरादून (23 सितंबर) : रनवे पर रफ्तार भरते या आसमान से जमीन छूने को तैयार विमानों के लिए देहरादून का जौलीग्रांट हवाईअड्डा और अमृतसर एयरपोर्ट बेहद संवेदनशील मोड़ पर हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII) के ताजा अध्ययन ने हवाई सुरक्षा को लेकर असहज करने वाले तथ्य सामने रखे हैं।

दोनों हवाईअड्डों के आसपास परिंदों का ऐसा जमावड़ा है, जिससे कभी भी गंभीर बर्ड स्ट्राइक (Bird Strike) हो सकती है। कुल 21 पक्षी प्रजातियों को विमान परिचालन के लिहाज से ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है।

जौलीग्रांट में 13 तो अमृतसर में 8 प्रजातियां बनीं सिरदर्द

शोध के आंकड़े बताते हैं कि देहरादून के जौलीग्रांट क्षेत्र में कुल 57 पक्षी प्रजातियां रिकॉर्ड हुईं, जिनमें से 13 प्रजातियां विमानों के लिए सीधा खतरा पैदा कर रही हैं। इनमें मुख्य रूप से टिटहरी, चील और कबूतर शामिल हैं। दूसरी ओर, अमृतसर हवाईअड्डे के आसपास दर्ज 50 प्रजातियों में से 8 को उच्च जोखिम की सूची में डाला गया है। बड़े आकार के पक्षी अगर जेट इंजन या विंडशील्ड से टकरा जाएं, तो परिणाम भयावह हो सकते हैं। कुछ ही समय पहले जौलीग्रांट में एक विमान को रनवे पर पक्षियों के डेरे की वजह से कई मिनट तक हवा में ही चक्कर लगाने पड़े थे।

आसमान के बाद अब जमीन पर सियार और साही का पहरा

चिंता सिर्फ उड़ते परिंदों तक सीमित नहीं। जौलीग्रांट में लगाए गए कैमरा ट्रैप की तस्वीरों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। रनवे और आसपास के परिसर में सियार, साही और खरगोश जैसे वन्यजीवों की लगातार आवाजाही दर्ज की गई है।

जमीनी वन्यजीवों के ऐन वक्त पर रनवे पर आ जाने से पूर्व में उड़ानों की लैंडिंग बाधित हो चुकी है। दरअसल राजाजी नेशनल पार्क के नजदीक स्थित होने के कारण इस इलाके में वन्यजीवों की स्वाभाविक बसावट है, जो एयरपोर्ट की चारदीवारी के बावजूद अंदर रास्ता तलाश लेते हैं।

WII के 37वें वार्षिक शोध सेमिनार में गूंजा मुद्दा

यह विस्तृत रिपोर्ट डब्ल्यूआईआई के 37वें वार्षिक अनुसंधान सेमिनार में सामने आई, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के पूर्व निदेशक जीएस रावत ने की। दो दिवसीय इस आयोजन के दौरान वन्यजीव संरक्षण, आवास बदलाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े 60 से अधिक शोध पत्र और 41 पोस्टर प्रदर्शित किए गए।

उद्घाटन के मौके पर वैज्ञानिकों के पांच अहम प्रकाशनों का विमोचन हुआ। शोध समन्वयक बिवाश पांडव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अपर वन महानिदेशक रमेश कुमार पांडे ने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय तंत्र की मदद से ही इस जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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