देहरादून, 16 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)
Uttarakhand Health News : उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार और न्यायपालिका दोनों स्तरों पर बड़े कदम उठाए गए हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने बांडधारी डॉक्टरों की सेवा अवधि को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों में रेफरल सिस्टम को कम करने के लिए निजी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की तैयारी शुरू कर दी है।
हाईकोर्ट का फैसला
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने डॉ. मेहुल सिंह गुंज्याल व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस के बाद बांड भरने वाले छात्र पीजी करने के बाद केवल तीन साल तक ही पहाड़ या दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देंगे।
अदालत ने डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि यदि किसी छात्र ने एमबीबीएस के बाद और पीजी में प्रवेश से पहले दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं, तो उस समय को उनके पीजी के बाद की अनिवार्य तीन साल की सेवा अवधि में गिना जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारों की रक्षा करते हुए कहा कि यदि कोई डॉक्टर पीजी के बाद सेवा शर्तों का उल्लंघन करता है, तो सरकार उनसे बांड की राशि वसूलने के लिए स्वतंत्र होगी।
निजी विशेषज्ञों से अनुबंध और भुगतान की नई व्यवस्था
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देशों के बाद अब जिला अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को रेफर नहीं किया जाएगा। सरकार ने निर्णय लिया है कि न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसे गंभीर विभागों में जहां डॉक्टरों के पद खाली हैं, वहां निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को बुलाया जाएगा।
इन डॉक्टरों को प्रति विजिट या प्रति सर्जरी के आधार पर भुगतान किया जाएगा। सीएमओ देहरादून डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, शासन से विशेषज्ञों की विजिट दरें निर्धारित होते ही इस योजना को जमीन पर उतार दिया जाएगा। इससे विशेषकर आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा, जिन्हें अब सर्जरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
डॉक्टरों का रोटेशन: 6 माह के लिए पहाड़ जाएंगे विशेषज्ञ
पहाड़ी जिलों के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने एक और महत्वपूर्ण रणनीति अपनाई है। मैदानी क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों को अब 6 महीने के लिए अनिवार्य रूप से पहाड़ भेजा जाएगा। प्रथम चरण में विभाग ने स्वेच्छा से जाने वाले डॉक्टरों से विकल्प मांगे हैं।
इसी कड़ी में दून अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ कोरोनेशन अस्पताल की कैथलैब में अपनी सेवाएं देंगे। प्राचार्य डॉ. गीता जैन की इस पहल के बाद यहां एंजियोप्लास्टी और ओपीडी की सुविधाएं नियमित होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि सरकार पहले से ही ‘यू कोट वी पे’ योजना के माध्यम से डॉक्टरों को उनकी मांग के अनुसार वेतन देकर दुर्गम क्षेत्रों में तैनात कर रही है।











