देहरादून/रुद्रप्रयाग, 11 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के चरम के बीच कुदरत के तेवर बदलने वाले हैं। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD Dehradun) ने राज्य में 11 मई से 16 मई तक मौसम में बड़े उलटफेर की भविष्यवाणी की है। सबसे ज्यादा चिंता की बात 12 और 13 मई को लेकर है, जिसके लिए विभाग ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी किया है। इस दौरान चारधाम रूट पर भारी बारिश, बिजली गिरने और ऊंचे शिखरों पर बर्फबारी की आशंका है।
गढ़वाल आयुक्त की अपील: “फिलहाल रुकें यात्री”
मौसम की संवेदनशीलता को देखते हुए गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सीधी अपील की है। उन्होंने कहा कि यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का ताजा अपडेट जरूर लें। आयुक्त ने सुझाव दिया कि यदि संभव हो, तो 12 और 13 मई के बीच अपने यात्रा कार्यक्रम को टाल दें और मौसम सामान्य होने का इंतजार करें। पहाड़ों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं और आकाशीय बिजली यात्रा मार्ग पर चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं।
मैदानों में राहत, पहाड़ों में आफत
मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, सोमवार को पहाड़ी जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) रहेगा, लेकिन मंगलवार से स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है, जिससे ठिठुरन बढ़ गई है। पुलिस स्टेशनों और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका जा सके।
बदले केदारनाथ में पुराने दिनों की यादें

इन मौसम चुनौतियों के बीच केदारनाथ धाम में पहुंचे यात्रियों के लिए भावुक पल भी देखने को मिल रहे हैं। 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ का भूगोल काफी बदल चुका है। मध्य प्रदेश से आए 77 वर्षीय श्रद्धालु धानेश ने साझा किया कि वे 13 साल बाद बाबा के दर्शन करने आए हैं। उन्हें वह पुराना दौर याद है जब गौरीकुंड से रामबाड़ा होकर गरुड़चट्टी और देवदर्शनी के रास्ते मंदिर पहुंचा जाता था।
गरुड़चट्टी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 के दशक में साधना की थी, आज भी सुरक्षित है। पुराने यात्री आज भी उस मार्ग की चाय और संतों के सान्निध्य को याद करते हैं। हालांकि, अब यात्रा की प्राथमिकता सुरक्षा है, इसलिए प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि किसी भी सूरत में नियमों का उल्लंघन न करें।








