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उत्तराखंड: 153 करोड़ की लागत से लगेंगे 500 नए भूकंप सेंसर, 10 शहरों में मजबूत होगा भूकंप चेतावनी नेटवर्क

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए पूर्व चेतावनी तंत्र (EEWS) के विस्तार के लिए 153.44 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की है। विधानसभा बजट सत्र के दौरान संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रदेश भर में 500 नए हाई-टेक सेंसर लगाने और संवेदनशील फाल्ट लाइनों की निगरानी सघन करने की पुष्टि की है।

उत्तराखंड: 153 करोड़ की लागत से लगेंगे 500 नए भूकंप सेंसर, 10 शहरों में मजबूत होगा भूकंप चेतावनी नेटवर्क

HIGHLIGHTS

  • कुल 153.44 करोड़ रुपये का बजट; केंद्र सरकार नेशनल अर्थक्वेक रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के तहत 90% फंड देगी।
  • हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (HFT) और मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) जैसे सक्रिय फाल्ट जोन्स में होगी नई सेंसरों की तैनाती।
  • वर्तमान में स्थापित 169 सेंसरों में से 41 तकनीकी कारणों से बंद, मरम्मत के लिए IIT रुड़की की टीम तैनात।
  • देहरादून, चमोली और पिथौरागढ़ सहित 10 महत्वपूर्ण जिलों को 'डेंजर ज़ोन' मैपिंग के लिए चिह्नित किया गया।

भरारीसैंण (गैरसैंण)। उत्तराखंड सरकार ने हिमालयी क्षेत्र में आने वाले संभावित भूकंपों की पूर्व चेतावनी देने वाले सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। विधानसभा के बजट सत्र में संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय भूकंप जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम (NERMP) के तहत राज्य में 500 नए सेंसर स्थापित किए जाएंगे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भूकंप आने से कुछ सेकंड पहले सटीक चेतावनी जारी करना है ताकि जनहानि को न्यूनतम किया जा सके। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, यह विस्तार उन क्षेत्रों में प्राथमिकता पर किया जाएगा जो भूकंपीय जोन-5 और जोन-4 की श्रेणी में आते हैं।

₹153.44 करोड़ का बजट और केंद्र-राज्य का फंडिंग समीकरण

परियोजना के वित्तीय ढांचे को लेकर शासन के निर्देशों के तहत स्पष्ट किया गया है कि इसमें केंद्र सरकार की बड़ी हिस्सेदारी होगी। नेशनल अर्थक्वेक रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम (NERMP) के अंतर्गत केंद्र सरकार कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा अनुदान के रूप में उपलब्ध कराएगी। वहीं, शेष 10 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा वहन की जाएगी।

रिकॉर्ड बताते हैं कि पूर्व में स्थापित नेटवर्क की तुलना में यह अब तक का सबसे बड़ा तकनीकी निवेश है, जो राज्य के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों को सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ेगा।

सक्रिय फाल्ट लाइनों (HFT और MCT) पर बढ़ेगी सीधी निगरानी

तकनीकी रणनीति के आधार पर नए सेंसरों की स्थापना के लिए उन भौगोलिक क्षेत्रों का चयन किया गया है जहाँ भूगर्भीय हलचल सबसे अधिक रहती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सेंसरों का जाल मुख्य रूप से हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (HFT), मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) और मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) जैसे सक्रिय फॉल्ट जोन्स में बिछाया जाएगा।

इसी बीच, उत्तराखंड की नेपाल और हिमाचल प्रदेश से सटी सीमाओं पर भी निगरानी तंत्र को सघन करने का निर्णय लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन फाल्ट लाइनों पर सेंसर की संख्या बढ़ने से डेटा की सटीकता में 30 प्रतिशत तक सुधार होने की उम्मीद है।

41 सेंसर बंद होने के बीच IIT रुड़की को सौंपी गई मरम्मत की कमान

वर्तमान नेटवर्क की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राज्य में अभी 169 सेंसर स्थापित हैं, लेकिन रखरखाव एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्तमान में 128 सेंसर ही सुचारू रूप से डेटा भेज रहे हैं, जबकि 41 सेंसर बिजली आपूर्ति की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बंद पड़े हैं।

तय योजना के अनुसार, आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ टीम को इन खराब सेंसरों की तत्काल मरम्मत और नए स्टेशनों की साइट मैपिंग की जिम्मेदारी दी गई है। शासन के निर्देशों के तहत, अब नए सेंसरों के साथ ‘पावर बैकअप’ की वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

पूर्व चेतावनी समय (Lead Time) में सुधार का रणनीतिक लक्ष्य

इस निवेश का सीधा असर भूकंप अलर्ट ऐप और सायरन सिस्टम की कार्यक्षमता पर पड़ेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सिस्टम के माध्यम से भूकंप आने से 10 से 60 सेकंड पहले अलर्ट मिल पाता है, जिसे अब और अधिक बढ़ाने का लक्ष्य है। वहीं, प्रदेश के 10 जिलों—देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, जोशीमठ, टिहरी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चंपावत और अल्मोड़ा—को इस नेटवर्क के केंद्र के रूप में चिह्नित किया गया है। रिकॉर्ड बताते हैं कि इन क्षेत्रों में सेंसर घनत्व बढ़ने से भूकंप का ‘एपिकेंटर’ ट्रैक करने में लगने वाला समय आधा रह जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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