नई दिल्ली। विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना की प्रगति का डेटा सार्वजनिक किया। सांसद अजय भट्ट द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक पारदर्शिता के लिए पेपरलेस इकोसिस्टम पर काम जारी है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, देश के 3,240 न्यायालय परिसरों और 1,272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) की सुविधा स्थापित की जा चुकी है।
3.97 करोड़ डिजिटल सुनवाइयां और राजस्व संग्रह
विभागीय सूत्रों के अनुसार, न्यायालयों ने अब तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाइयां पूरी की हैं। इसी बीच, वर्चुअल कोर्ट प्रणाली ने 10.13 करोड़ चालानों का निपटारा कर 1002.73 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रहित किया। शासन के निर्देशों के तहत 11 उच्च न्यायालयों में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हो चुकी है। रिकॉर्ड बताते हैं कि ई-भुगतान प्रणाली ने अब तक 1,404 करोड़ रुपये की कोर्ट फीस और 75 करोड़ रुपये का जुर्माना डिजिटल माध्यम से प्राप्त किया है।
उत्तराखंड: 1.02 लाख मामलों की ई-फाइलिंग
वहीं अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय और इसके अधीन जिला अदालतों में ई-फाइलिंग प्रभावी रूप से लागू है। 13 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के उच्च न्यायालय में 341 मामले डिजिटल दर्ज हुए। जिला न्यायालयों में यह संख्या 1,01,854 तक पहुंच गई है। कुल मिलाकर उत्तराखंड में 1,02,195 मामलों का पंजीकरण ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से किया गया।
तकनीकी बुनियादी ढांचा और मोबाइल एक्सेस
तय योजना के अनुसार, न्याय विभाग ने ‘जस्टआईएस ऐप’ और ‘ई-न्यायालय सर्विसेज’ मोबाइल ऐप के जरिए सेवाओं का विस्तार किया है। ई-न्यायालय ऐप को अब तक 3.59 करोड़ बार डाउनलोड किया गया। शासन ने जिला अदालतों की 730 वेबसाइटों को S3WaaS प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया है। एनएसटीईपी (NSTEP) प्रणाली के तहत 7.29 करोड़ ई-आदेशिकाओं का निष्पादन जीपीएस सक्षम वितरण तंत्र से किया गया। डिजिटल न्यायालय 2.1 के तहत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग अनुवाद और प्रतिलेखन के लिए किया जा रहा है।












