चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में जीव विज्ञान के स्थापित नियमों को चुनौती देने वाले गिने-चुने मामले ही दर्ज हैं, लेकिन ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (British Journal of Obstetrics and Gynaecology) में प्रकाशित एक पुरानी केस स्टडी आज भी मेडिकल जगत में गहरी हैरानी की वजह बनी हुई है।
यूनाइटेड किंगडम के एक अस्पताल में पहुंची 15 साल की एक लड़की ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद डॉक्टरों ने पाया कि वह नौ महीने की गर्भवती थी और लेबर पेन से गुजर रही थी। सबसे स्तब्ध करने वाला पहलू यह था कि किशोरी ने अपने जीवन में कभी पारंपरिक शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे और न ही उसके शरीर की बनावट सामान्य गर्भधारण की इजाजत देती थी।
शरीर की बनावट ऐसी कि सामान्य गर्भधारण असंभव था
अस्पताल में जांच के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञों ने पाया कि किशोरी एक दुर्लभ जन्मजात विकार से ग्रसित थी, जिसे मेडिकल भाषा में एप्लास्टिक डिस्टल वेजाइना (Aplastic Distal Vagina) कहा जाता है। उसके जननांग पूरी तरह अविकसित थे और उसकी ‘ब्लाइंड वेजाइना’ की गहराई महज दो सेंटीमीटर थी। इस शारीरिक संरचना के चलते किसी भी तरह का पेनिट्रेटिव इंटरकोर्स होना नामुमकिन था।
किशोरी को अपनी उम्र तक कभी माहवारी (Menstruation) भी नहीं आई थी। चूंकि सामान्य रूप से गर्भधारण का कोई रास्ता नहीं था, इसलिए जब उसका पेट धीरे-धीरे बढ़ने लगा, तो उसने या उसके परिजनों ने प्रेगनेंसी का अंदेशा तक नहीं जताया। उन्हें लगा कि यह वजन बढ़ने या किसी अन्य शारीरिक सूजन की वजह से हो रहा है।
पेट में चाकू का घाव और वो दुर्लभ वैज्ञानिक इत्तेफाक
जब डॉक्टरों ने लड़की से उसकी मेडिकल हिस्ट्री जानी, तो एक असामान्य घटनाक्रम की कड़ी सामने आई। प्रसव से करीब नौ महीने पहले किशोरी पेट में चाकू लगने के कारण गंभीर हालत में इमरजेंसी वार्ड पहुंची थी, जहां दो युवकों द्वारा किए गए हमले में उसके पेट के ऊपरी हिस्से में गहरा कट लगा था। जांच में सामने आया कि उस घटना से ठीक पहले उसने ओरल सेक्स किया था। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, चाकू के घाव ने उसके पेट की अंदरूनी दीवार को चीर दिया था।
डॉक्टरों ने अपनी थ्योरी में समझाया कि ओरल सेक्स के बाद जब किशोरी को अस्पताल ले जाया गया, तो सर्जरी से पहले उसका पेट पूरी तरह खाली था। खाली पेट होने की वजह से उसके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में पाचक हाइड्रोक्लोरिक एसिड का स्राव न्यूनतम था। इसी दौरान लार के उच्च पीएच (Alkaline pH) ने जीवित शुक्राणुओं (Spermatozoa) को एसिडिक असर से बचा लिया। चाकू के जरिए पेट में बने सीधे सुराख और अंदरूनी घाव के रास्ते ये शुक्राणु पेट की गुहा (Abdominal Cavity) से होते हुए फेलोपियन ट्यूब और प्रजनन अंगों तक तैरकर पहुंचने में सफल रहे।
सिजेरियन सर्जरी से हुआ जन्म, मेडिकल जगत के लिए अनसुलझा सवाल

इस केस को डॉक्टरों ने ‘ओरल कॉन्सेप्शन’ का नाम दिया, जो वैश्विक स्तर पर प्रलेखित सबसे दुर्लभ केस स्टडीज में शुमार है। चूंकि किशोरी की प्राकृतिक बर्थ कैनाल नहीं थी, इसलिए सामान्य प्रसव संभव नहीं था। सर्जनों की एक विशेष टीम ने इमरजेंसी सिजेरियन सेक्शन (C-Section) के जरिए एक पूरी तरह स्वस्थ बच्चे को जन्म दिलवाया। इस हैरतअंगेज मामले ने साबित किया कि बेहद जटिल और असामान्य परिस्थितियों में जब कई दुर्लभ जैविक कारक एक साथ सक्रिय हो जाएं, तो शारीरिक सीमाओं के बावजूद गर्भधारण की ऐसी घटनाएं घट सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे प्रकृति का एक अनोखा विचलन मानते हैं और स्पष्ट करते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में ओरल एक्टिविटी से गर्भधारण का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता।










