प्यार किसी उम्र, सरहद या कायदों का मोहताज नहीं होता—यह कहावत तो बरसों पुरानी है, लेकिन जब हकीकत में ऐसा कुछ घटता है तो समाज की भौंहें तन जाती हैं। ऐसा ही एक वाकया पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से सामने आया है, जहां रावलपिंडी के एक जाने-माने मौलाना हकीम साहब हाकिम बाबर ने अपने से करीब 44 साल छोटी महिला को अपना जीवनसाथी चुन लिया है।
मौलाना की उम्र जहां 70 साल बताई जा रही है, वहीं उनकी बेगम महज 26 साल की हैं। शादी के तुरंत बाद दोनों ने एक बाकायदा पेशेवर ब्राइडल फोटोशूट (Bridal Photoshoot) कराया, जिसकी क्लिप्स और तस्वीरें बाहर आते ही इंटरनेट पर तूफानी बहस शुरू हो गई।
सफेद दाढ़ी, 44 साल का फासला और वायरल फोटोशूट का तहलका
दोनों के फोटोशूट में मौलाना की गोद में लेटकर पोज देती दुल्हन की अदाएं सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कौतूहल और हैरानी की वजह बनी हुई हैं। मौलाना की सफेद दाढ़ी उनके और दुल्हन के बीच चार दशकों के भारी उम्र के अंतर को साफ बयां कर रही है।
जैसे ही ये तस्वीरें और वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर फैले, स्थानीय डिजिटल मीडिया रिपोर्टर्स और यूट्यूबर्स इंटरव्यू लेने सीधे उनके दरवाजे पर पहुंच गए। दंपति भी कैमरे से मुंह छिपाने के बजाय पूरे आत्मविश्वास से अपने इस रिश्ते को सही ठहरा रहा है।
‘अफेयर रखने वाले ज्ञान न दें’: ट्रोलर्स पर मौलाना का तीखा हमला

इंटरनेट पर हो रही ट्रोलिंग पर हकीम बाबर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह रिश्ता सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि मजहबी उसूलों के तहत मुकम्मल हुआ है। मौलाना का तर्क है:
“मेरी पत्नी तलाकशुदा थीं और किसी तलाकशुदा महिला से निकाह करना अल्लाह का हुक्म और पैगंबर की सुन्नत है। मैंने कोई गुनाह या व्यभिचार नहीं किया।”
उन्होंने अपनी आलोचना करने वालों पर तीखा वार करते हुए कहा कि जो लोग पीठ पीछे अवैध संबंध या गर्लफ्रेंड रखकर महिलाओं को धोखा देते हैं और शादी की जिम्मेदारी से भागते हैं, वे ही आज पवित्र निकाह पर सवाल उठा रहे हैं।
दुल्हन का दो-टूक जवाब: जब मोहब्बत हो तो शादी में देरी क्यों?
हकीम बाबर की 26 वर्षीय पत्नी ने भी अपने शौहर के सुर में सुर मिलाया। उनका कहना है कि जब दो इंसानों के दिल आपस में मिल जाएं और सच्चा लगाव हो, तो उम्र महज एक कागजी आंकड़ा बनकर रह जाती है। उनके मुताबिक, अगर जिंदगी में ऐसा हमसफर मिल जाए जो आपकी कद्र करता हो, तो निकाह करने में कतई देर नहीं करनी चाहिए। पड़ोसी मुल्क के डिजिटल स्पेस में अब यह शादी रूढ़िवादिता बनाम व्यक्तिगत आजादी के तीखे वाद-विवाद का केंद्र बनी हुई है।










