स्कूल-कॉलेज की दहलीज पार करने के बाद हर युवा अपनी पहली नौकरी को लेकर बेहद उत्साहित रहता है, लेकिन सोचिए अगर दफ्तर के पहले ही दिन बॉस स्वागत करने के बजाय आपकी गरिमा को ठेस पहुंचाए? ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है न्यू जीलैंड (New Zealand) से, जहां एक युवती को नौकरी जॉइन करते ही बॉस ने स्वागत पत्र की आड़ में 11 अपमानजनक नसीहतों वाला लेटर थमा दिया।
बेटी के हाथ में यह चिट्ठी देख पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने न सिर्फ बेटी से उसी वक्त वह टॉक्सिक नौकरी (Toxic Workplace) छुड़वाई, बल्कि उस चिट्ठी को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बॉस की मानसिकता को बेनकाब कर दिया। पिता ने सोशल मीडिया हैंडल @essjax से यह दस्तावेज साझा किया, जिसके बाद इंटरनेट पर कॉर्पोरेट कल्चर को लेकर जोरदार बहस छिड़ गई।
स्वागत के नाम पर घमंड और ताने
दस्तावेज में कंपनी की ओर से नए कर्मचारी को सख्त लहजे में अहसास कराया गया था कि दुनिया उसके आत्मसम्मान की परवाह नहीं करती। पत्र में लिखा था कि हाईस्कूल पास करते ही कोई लाखों के पैकेज या वाइस प्रेसिडेंट की कुर्सी का हकदार नहीं बन जाता।
हद तो तब हो गई जब चिट्ठी में लिखा गया कि ‘बर्गर पलटने के काम को छोटा न समझें’ और कर्मचारी के माता-पिता को लेकर भी फब्तियां कसी गईं। पत्र में कहा गया कि माता-पिता जन्म से उबाऊ नहीं थे, बल्कि जिम्मेदारियों ने उन्हें ऐसा बनाया है।
कंपनी ने स्कूल और असल जिंदगी की तुलना करते हुए लिखा कि नौकरी में कोई आपकी मदद नहीं करेगा और गलती होने पर जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। इतना ही नहीं, 11वें बिंदु में सहकर्मियों को ‘मूर्ख’ बताते हुए लिखा गया कि उनके साथ भी बना कर रखो, क्योंकि भविष्य में उनके साथ काम करना पड़ सकता है।
इंटरनेट पर भड़के लोग, वायरल हो चुका है पुराना फर्जी ड्राफ्ट
और मजे की बात यह है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट आते ही हजारों यूजर्स युवती और उसके पिता के समर्थन में उतर आए। कई यूजर्स ने इसे खुला मानसिक शोषण (Workplace Bullying) करार दिया। दरअसल, सोशल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि यह 11 सूत्रीय सूची कोई नई नहीं है; इंटरनेट पर वर्षों से इसे बिल गेट्स के नाम पर फर्जी तरीके से ‘लाइफ रूल्स’ बताकर शेयर किया जाता रहा है, जबकि असल में यह लेखक चार्ल्स जे. साइक्स की एक किताब के विचार थे।
बहरहाल, किसी पेशेवर कंपनी द्वारा अपने नए कर्मचारी के ओरिएंटेशन में ऐसे तंज भरे कोटेशन को आधिकारिक रूप से थमाना लोगों को कतई रास नहीं आया। पिता ने साफ किया कि आत्मसम्मान से समझौता करके कोई भी काम नहीं किया जा सकता, जिसके बाद उनकी बेटी ने उस संस्थान को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।




