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सावन में जलाभिषेक का क्या है सही नियम? इस तरह पूजा करने से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Wed, 05 Aug 2026 10:03 AM IST
Sawan Jalabhishek Niyam

Sawan Jalabhishek Niyam : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद पावन माना जाता है। इस दौरान भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए जल, दूध, पंचामृत और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए और सामग्री अर्पण का सही तरीका क्या है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा सामग्री का सही क्रम ध्यान में रखने से पूजा संपूर्ण मानी जाती है।

अगर आप भी सावन में जलाभिषेक करने जा रहे हैं, तो जानिए इसकी सही और आसान विधि।

जलाभिषेक के लिए जरूरी सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले अपनी थाली में ये आवश्यक सामग्रियां एकत्र कर लें:

  • तांबे या पीतल का लोटा
  • गंगाजल या शुद्ध पेयजल
  • गाय का कच्चा दूध और शहद
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण)
  • अक्षत (अखंडित चावल) और सफेद चंदन
  • बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल
  • मौसमी फल और भोग के लिए मिठाई

शिवलिंग पर जलाभिषेक का पहला चरण

सबसे पहले तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं। इस जल में थोड़े अक्षत, सफेद चंदन, गाय का कच्चा दूध और शहद की कुछ बूंदें डाल लें।

अब ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित करें। जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि धारा टूटनी नहीं चाहिए।

पंचामृत अभिषेक और शुद्धि का नियम

जल अर्पित करने के बाद अगर आप पंचामृत से अभिषेक कर रहे हैं, तो शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएं।

पंचामृत अर्पण के तुरंत बाद शिवलिंग पर दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं। ऐसा करने से शिवलिंग पर लगा दूध, दही, घी और शहद साफ हो जाता है। इसके बाद किसी साफ कपड़े से शिवलिंग को हल्के हाथों से पोंछकर साफ करें।

श्रृंगार और सामग्री अर्पण का सही क्रम

शिवलिंग की सफाई के बाद महादेव का श्रृंगार किया जाता है। इसके लिए नीचे दिए गए क्रम का पालन करें:

त्रिपुंड और भस्म: सबसे पहले सफेद चंदन या भस्म से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाएं।

बेलपत्र और धतूरा: इसके बाद बेलपत्र (जिसका चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ हो), धतूरा और फूल अर्पित करें।

भोग: अब अपनी श्रद्धा के अनुसार फल और मिठाई का भोग लगाएं।

आरती: अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी की आरती करें।

परिक्रमा से जुड़ा महत्वपूर्ण नियम

शिव पूजा के दौरान परिक्रमा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है।

जिस स्थान से जलाभिषेक का जल बाहर निकलता है, उसे सोमसूत्र या निर्मली कहा जाता है। इसे लांघा नहीं जाता, इसलिए हमेशा आधी परिक्रमा (चन्द्राकार परिक्रमा) करके ही वापस लौट आएं।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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