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Indian Railways Safety Norms : रेलवे का वेंडर्स पर शिकंजा, घटिया पार्ट्स पर ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Wed, 30 Sep 2026 10:29 PM IST

ट्रेनों में तकनीकी खराबी रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने पुर्जों की मार्किंग और वॉरंटी पर नियम सख्त कर दिए हैं। गड़बड़ी मिलने पर वेंडर को पूरा लॉट अपने खर्चे पर बदलना होगा।

Indian Railways Safety Norms

मुख्य बातें

  • उपकरण फेल होने पर सप्लायर की पहचान न हो पाना बना था रेलवे का बड़ा सिरदर्द।
  • हर पुर्जे पर निर्माता का कोड, सीरियल नंबर और निर्माण की तारीख दर्ज करना अनिवार्य।
  • कपलर, ब्रेक गियर और बोगी जैसे 10 क्रिटिकल पार्ट्स पर रहेगी कड़ी निगरानी।
  • बिना स्पष्ट मार्किंग वाले पुर्जों का पूरा लॉट होगा रिजेक्ट, सप्लायर उठाएगा ढुलाई खर्च।
  • डिपो और एग्जामिनेशन यार्ड में सामान फिट करते समय होगी रैंडम चेकिंग।

Indian Railways Safety Norms : पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों में अचानक आने वाली तकनीकी खराबी और सुरक्षा चूक से निपटने के लिए भारतीय रेलवे ने पुर्जों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों पर कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में जब भी किसी बोगी में खामी आई, तो जांच टीमों के हाथ खाली रह गए। वजह साफ थी—टूटने या घिसने वाले पार्ट्स पर न तो सप्लायर का नाम दर्ज था और न ही कोई सुस्पष्ट बैच नंबर। नतीजा यह होता था कि घटिया माल खपाने वाले वेंडर्स पर सीधी जवाबदेही तय नहीं हो पाती थी।

इसी लूपहोल को जड़ से खत्म करने के लिए अनुसंधान डिजाइन व मानक संगठन (RDSO) ने कड़े दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। अब रेलवे नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले हर पुर्जे की पूरी कुंडली उस पर उकेरी होनी चाहिए।

मार्किंग का साइज और गहराई भी होगी तय

रेलवे के नए प्रावधानों के तहत अब खानापूर्ति वाली मार्किंग नहीं चलेगी। सप्लायर को पुर्जे पर अपना नाम, यूनिक कोड, निर्माण का महीना, साल और बैच नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। यह मार्किंग कहां होगी, उसका फॉन्ट साइज क्या रहेगा और धातु में उसकी गहराई कितनी होगी, इसका पूरा पैमाना आरडीएसओ के तकनीकी मैनुअल के अनुसार तय होगा।

अगर अक्षर घिसे हुए मिले या उन्हें आसानी से पढ़ा नहीं जा सका, तो उस कलपुर्जे को गैर-मानक माना जाएगा। इस पूरी कवायद का सीधा मकसद पुर्जों की ट्रैसेबिलिटी (Traceability) सुनिश्चित करना है, ताकि हादसे या खराबी की सूरत में सप्लायर के खिलाफ दस्तावेजी कार्रवाई हो सके।

इन 10 क्रिटिकल उपकरणों की होगी सघन जांच

रेलवे ने उन संवेदनशील कलपुर्जों की लिस्ट तैयार की है, जिनकी नाकामी सीधे ट्रेन परिचालन और यात्रियों की जान को जोखिम में डालती है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कपलर और ड्राफ्ट गियर
  • ब्रेक ब्लॉक व कंप्रेस्ड-एयर ब्रेक उपकरण
  • बोगी, साइड बियरर और एडॉप्टर
  • कॉइल स्प्रिंग, ब्रेक बीम और वियर प्लेट्स

जोनल रेलवे को दिए गए निर्देश में साफ कहा गया है कि अब सिर्फ फैक्ट्री गेट पर कागजी जांच काफी नहीं होगी। जब सामान डिपो में पहुंचेगा, जब उसे कोच में फिट किया जाएगा और बाद में जब यार्ड में रूटीन ओवरहॉलिंग होगी—इन तीनों चरणों पर औचक भौतिक निरीक्षण (Random Inspection) किया जाएगा।

जेब ढीली करेगा वेंडर, पूरा लॉट होगा बाहर

अगर किसी लॉट के चंद पुर्जों पर भी पहचान कोड अधूरा या गलत मिला, तो रेलवे उस पूरे कंसाइनमेंट को सीधे खारिज कर देगा। सप्लायर को वॉरंटी नियमों के तहत पूरा माल अपने खर्च पर बदलना होगा।

यही नहीं, रिजेक्टेड माल को रेलवे यार्ड से वापस अपनी फैक्ट्री ले जाने और नया सही माल दोबारा डिपो तक पहुंचाने का पूरा ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी उसी कंपनी को भुगतना पड़ेगा। बार-बार मानक तोड़ने वाली फर्मों को रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल (IREPS) पर डिबार या ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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