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आम ग्राहकों और दुकानदारों को बड़ी राहत, दिवाली तक नहीं लगेगा ₹2,000 से ऊपर के UPI पर मर्चेंट चार्ज

NPCI ने ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाला MDR शुल्क दिवाली तक टाला। आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई रहेगा पूरी तरह फ्री।

Published On: October 13, 2026 3:50 PM
UPI MDR charge

मुख्य बातें

  • NPCI ने ₹2,000 से बड़े UPI मर्चेंट चार्ज दिवाली तक टाले।
  • लागू होने पर ₹2,000 से अधिक भुगतान पर लगेगा 0.4% मर्चेंट शुल्क।
  • आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों के लिए UPI बिल्कुल मुफ्त रहेगा।

नई दिल्ली (13 अक्टूबर) : त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश के करोड़ों खुदरा व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शंस (P2M) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है।

अब यह नई चार्ज व्यवस्था दिवाली के बाद लागू की जाएगी, जिसकी सटीक तारीख का एलान आगे किया जाएगा। इस फैसले का सीधा मकसद त्योहारी बाजार में खरीदारी की रफ्तार बनाए रखना और नकदी प्रवाह को आसान रखना है।

एनपीसीआई ने टाला मर्चेंट पेमेंट्स पर नया चार्ज

एनपीसीआई के नए फ्रेमवर्क के तहत जब भी यह व्यवस्था लागू होगी, तब ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4% का एमडीआर शुल्क लगेगा। इस चार्ज को बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) और यूपीआई ऐप कंपनियों के बीच आपस में साझा किया जाएगा। हालांकि, आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए जरूरी सेवाओं के लिए खास रियायत दी गई है।

रेलवे टिकट बुकिंग, टेलीकॉम रिचार्ज, इंश्योरेंस प्रीमियम, पेट्रोल-डीजल और कृषि से जुड़े लेन-देन में ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर कोई प्रतिशत आधारित शुल्क नहीं कटेगा, बल्कि केवल ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा। इसके अलावा कैपिटल मार्केट यानी म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर्स को किए जाने वाले पेमेंट्स पर 0.02% की दर से एमडीआर तय किया गया है, जिसमें अधिकतम चार्ज की सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।

आम ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ

इस पूरे बदलाव में सबसे राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ता की जेब पर इसका कोई असर नहीं होगा। यदि आप अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिचित के बैंक खाते में पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पैसे ट्रांसफर करते हैं, तो वह पहले की तरह शत-प्रतिशत मुफ्त रहेगा। वहीं किसी भी दुकान, रेस्टोरेंट या मॉल में ₹2,000 तक की खरीदारी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।

छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए भी बड़ी सुरक्षा रखी गई है। पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (P2PM) श्रेणी के तहत छोटे कारोबारी अपने क्यूआर कोड (QR Code) पर हर महीने ₹1 लाख तक का भुगतान बिना किसी एमडीआर शुल्क के ले सकेंगे। इसका मतलब यह है कि छोटे कारोबारियों का मुनाफा सुरक्षित रहेगा और ग्राहकों को भी किसी तरह का अतिरिक्त भार नहीं सहना पड़ेगा।

दिवाली बाद आएगी नई तारीख जानिए अपने कानूनी अधिकार

एनपीसीआई दिवाली के तुरंत बाद इस नियम को जमीन पर उतारने के लिए नई तारीख और विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा। यहां ग्राहकों के लिए अपने अधिकारों को समझना बेहद जरूरी है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के स्पष्ट नियमों के मुताबिक, एमडीआर का खर्च मर्चेंट और सर्विस प्रोवाइडर के बीच का व्यावसायिक समझौता होता है; कोई भी दुकानदार या व्यापारी यूपीआई पेमेंट लेने के बदले ग्राहक से अतिरिक्त सुविधा शुल्क या सरचार्ज नहीं वसूल सकता।

यदि कोई दुकानदार ₹2,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर आपसे अतिरिक्त पैसे की मांग करता है, तो आप उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या आईएनजीआरएएम (INGRAM) पोर्टल पर सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा बैंक स्तर पर समाधान न होने पर आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल (cms.rbi.org.in) पर भी केस दर्ज कराया जा सकता है।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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