EPF vs NPS Return : नौकरीपेशा तबके के लिए रिटायरमेंट की प्लानिंग केवल बचत का फैसला नहीं, बल्कि बुढ़ापे में आर्थिक आजादी की गारंटी होती है। अगर कोई वेतनभोगी अपने करियर के शुरुआती या मध्यम दौर में हर महीने ₹10,000 की अनुशासित बचत शुरू करता है और इसे 30 साल तक लगातार जारी रखता है, तो उसकी जेब से कुल ₹36 लाख का मूलधन निवेश होता है।
तीन दशकों के इस लंबे सफर में यह जमा पूंजी कितनी बड़ी वेल्थ में तब्दील होगी, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) चुनी है या नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)। दोनों स्कीमें अलग-अलग जोखिम और एसेट क्लास पर काम करती हैं, जिसके चलते रिटायरमेंट कॉर्पस में ₹69 लाख तक का भारी अंतर देखने को मिलता है।
ईपीएफ पर 8.25% ब्याज, एनपीएस में 75% शेयर निवेश

कर्मचारी भविष्य निधि उन निवेशकों की पहली पसंद है जो शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर गारंटीड रिटर्न चाहते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने ईपीएफ पर 8.25 फीसदी की ब्याज दर तय की है। हालांकि सरकार हर वित्त वर्ष में इसकी समीक्षा कर नई दरें घोषित करती है, लेकिन यदि पूरे 30 वर्षों का औसत 8.25 फीसदी भी मान लिया जाए, तो ₹10,000 की मासिक बचत से कुल ₹1.57 करोड़ का फंड तैयार हो जाता है।
इसमें आपके ₹36 लाख के मूलधन पर ₹1.21 करोड़ से ज्यादा का कंपाउंडिंग ब्याज मिलता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि आपका मूलधन और अर्जित ब्याज बाजार के दैनिक जोखिम से शत-प्रतिशत सुरक्षित रहता है।
दूसरी तरफ, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का पूरा ढांचा बाजार से जुड़ा हुआ है। पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए (PFRDA) के दिशा-निर्देशों के तहत निवेशक का पैसा शेयर बाजार, कॉरपोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाता है। एनपीएस अंशधारक को ‘एक्टिव चॉइस’ (Active Choice) का विकल्प मिलता है, जिसके तहत वह अपने पोर्टफोलियो का अधिकतम 75 फीसदी हिस्सा सीधे इक्विटी यानी शेयर बाजार में आवंटित कर सकता है।
अगर कोई निवेशक 75% इक्विटी विकल्प चुनता है और उसे 30 साल में औसतन 10 फीसदी सालाना सीएजीआर (CAGR) रिटर्न मिलता है, तो उसका ₹10,000 का मासिक निवेश ₹2.26 करोड़ का विशाल कॉर्पस बना देता है। यदि बाजार सुस्त रहा और औसत रिटर्न 9 फीसदी भी बैठता है, तब भी कुल फंड लगभग ₹1.83 करोड़ तैयार हो जाएगा।
एनपीएस में ₹69 लाख अधिक रिटर्न, ईपीएफ सुरक्षित
यदि दोनों विकल्पों के अंतिम आंकड़ों की तुलना की जाए, तो 10 फीसदी के अनुमानित रिटर्न पर एनपीएस (₹2.26 करोड़) सीधे तौर पर ईपीएफ (₹1.57 करोड़) से लगभग ₹69 लाख आगे निकल जाता है। लेकिन इस अतिरिक्त वेल्थ के साथ इक्विटी का बाजार जोखिम भी जुड़ा हुआ है। इसके विपरीत, ईपीएफ में निवेशक को बाजार गिरने या मंदी का कोई तनाव नहीं होता, क्योंकि इसमें मिलने वाला रिटर्न सरकारी गारंटी के साथ आता है।

| तुलनात्मक पैमाना | कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) | नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) |
| मासिक निवेश | ₹10,000 | ₹10,000 |
| 30 साल में कुल जमा | ₹36,00,000 | ₹36,00,000 |
| अनुमानित औसत रिटर्न | 8.25% (वार्षिक घोषित) | 10% (बाजार आधारित अनुमान) |
| 30 साल बाद कुल कॉर्पस | ₹1.57 करोड़ | ₹2.26 करोड़ |
| जोखिम की श्रेणी | शून्य (सरकारी गारंटी) | मध्यम से उच्च (बाजार आधारित) |
| निकासी की छूट | 58 की उम्र पर 100% एकमुश्त | 60 की उम्र पर 60% एकमुश्त, 40% एन्युटी |
निकासी के कड़े नियम, अनिवार्य पेंशन और टैक्स अलर्ट
पैसा बनाने के बाद सबसे अहम मोड़ रिटायरमेंट के समय फंड की निकासी और टैक्स देनदारी का आता है। ईपीएफ में 58 वर्ष की उम्र पूरी होने पर रिटायरमेंट के समय खाते में जमा पूरा 100 फीसदी फंड एकमुश्त निकालने की छूट मिलती है, और यह पूरी रकम टैक्स-फ्री होती है। नौकरी के दौरान भी शादी, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए ईपीएफओ (EPFO) के ऑनलाइन पोर्टल या उमंग ऐप से आंशिक निकासी की जा सकती है। टैक्स के मोर्चे पर ईपीएफ ‘ट्रिपल ई’ (EEE) दर्जे में आता है, लेकिन ध्यान रहे कि यदि किसी कर्मचारी का सालाना ईपीएफ योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त हिस्से पर मिलने वाला ब्याज टैक्स स्लैब के तहत टैक्सेबल हो जाता है।
एनपीएस मुख्य रूप से नियमित मासिक पेंशन देने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इसके नियमों के तहत 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट पर आप कुल कॉर्पस का अधिकतम 60 फीसदी हिस्सा ही एकमुश्त टैक्स-फ्री निकाल सकते हैं। शेष न्यूनतम 40 फीसदी हिस्से से लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से अनिवार्य रूप से एन्युटी (Annuity) खरीदनी होती है, जिससे ताउम्र मासिक पेंशन मिलती है। हालांकि, पीएफआरडीए ने अब निवेशकों को ‘सिस्टेमैटिक लम्पसम विदड्रॉल’ (SLW) की सुविधा भी दी है, जिससे 60% लम्पसम को 75 साल की उम्र तक किस्तों में निकाला जा सकता है ताकि बाकी पैसे पर रिटर्न बनता रहे।
टैक्स के मोर्चे पर एनपीएस में धारा 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। साथ ही, कॉरपोरेट एनपीएस के तहत धारा 80CCD(2) में बेसिक सैलरी के 10% (सरकारी कर्मचारियों के लिए 14%) तक एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन पर अलग से टैक्स डिडक्शन का फायदा उठाया जा सकता है।









