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हरिद्वार: भीमगोड़ा बैराज से अचानक छूटा पानी, गंगा टापू पर फंसे 35 श्रद्धालु बचाए गए

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 01 Nov 2026 03:11 PM IST

हरिद्वार में गंगनहर बंदी के बीच बड़ी गंगा के टापू पर स्नान कर रहे 35 श्रद्धालु जलस्तर बढ़ने से फंस गए। SDRF और जल पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू किया।

Haridwar rescue operation

मुख्य बातें

  • गंगनहर बंदी के चलते श्रद्धालु बड़ी गंगा की धारा की ओर बढ़े
  • भीमगोड़ा बैराज से पानी छोड़ते ही टापू पर फंसे 35 श्रद्धालु
  • एसडीआरएफ और जल पुलिस ने बोट से सभी को सुरक्षित निकाला

हरिद्वार (1 नवंबर) : गंगनहर की वार्षिक बंदी के कारण हरकी पैड़ी के आसपास जलसंकट से जूझ रहे श्रद्धालुओं का बड़ी गंगा की ओर रुख करना शनिवार को जानलेवा साबित होते-होते बचा। भीमगोड़ा बैराज से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे दीनदयाल उपाध्याय पार्किंग के पीछे गंगा के बीच बने एक टापू पर स्नान कर रहे 35 श्रद्धालु चारों तरफ से पानी से घिर गए।

सुबह करीब 11 बजे जलस्तर बढ़ने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आपदा कंट्रोल रूम की सूचना पर राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), जल पुलिस और 40वीं वाहिनी पीएसी के राहत दल ने संयुक्त मोर्चा संभाला और बोट के जरिए सभी 35 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बैराज से अचानक पानी छूटने पर मची भगदड़

शनिवार सुबह करीब 11 बजे जब श्रद्धालु दीनदयाल उपाध्याय पार्किंग (पंतद्वीप) के पीछे गंगा के बीच बने टापू पर स्नान कर रहे थे, तभी भीमगोड़ा बैराज से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। बहाव इतना तेज था कि कुछ ही मिनटों में टापू का संपर्क मुख्य तट से पूरी तरह कट गया और चारों तरफ गहरा पानी भर गया। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ के उपनिरीक्षक आशीष त्यागी के नेतृत्व में टीम लाइफ जैकेट्स और मोटर बोट्स लेकर मौके पर पहुंची। एसडीआरएफ, जल पुलिस और 40वीं वाहिनी पीएसी के जवानों ने तेज धारा के बीच तालमेल बैठाकर एक-एक कर सभी श्रद्धालुओं को बोट में बैठाया और सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया।

गंगनहर बंदी के चलते क्यों बढ़ा बड़ा खतरा

इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य वजह हर साल दशहरे से दीपावली के बीच होने वाली गंगनहर की वार्षिक सफाई और मेंटेनेंस बंदी है। नहर में पानी का प्रवाह बंद रहने से हरकी पैड़ी के आसपास के सहायक घाटों पर केवल आचमन लायक पानी ही बचता है, जबकि बाकी क्षेत्र सूख जाता है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्री स्नान के लिए बड़ी गंगा की मुख्य जलधारा और उसके बीच बने टापुओं की ओर रुख कर लेते हैं। मुख्य गंगा में बैराज से समय-समय पर पानी नियंत्रित और डिस्चार्ज किया जाता है। जल स्तर में अचानक होने वाले इस बदलाव की भनक खुले टापू पर स्नान कर रहे यात्रियों को समय रहते नहीं लग पाती, जिससे वे बीच धारा में फंस जाते हैं।

प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा सतर्कता बढ़ाई

सफल रेस्क्यू अभियान के बाद स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन तंत्र ने गंगनहर बंदी अवधि तक गंगा के खुले टापुओं और संवेदनशील तटों पर निगरानी बढ़ा दी है। एसडीआरएफ एसआई आशीष त्यागी ने बताया कि समय पर मिली सटीक सूचना और तीनों टीमों के समन्वय से सभी श्रद्धालुओं को सकुशल निकाल लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। पुलिस और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें तथा बीच धारा या टापुओं पर जाने का जोखिम न उठाएं, क्योंकि बैराज से जल निकासी की स्थिति में जलस्तर किसी भी समय बढ़ सकता है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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