परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उनके वित्तीय और पहचान से जुड़े दस्तावेजों को संभालना सबसे अहम काम होता है। देश में 12 अंकों का आधार कार्ड हर नागरिक की पहचान और बैंकिंग का मुख्य आधार है। ऐसे में किसी परिजन के निधन के बाद उनके आधार का दुरुपयोग होने या किसी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का शिकार बनने का खतरा हमेशा बना रहता है। इस जोखिम को रोकने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने myAadhaar पोर्टल पर एक खास ऑनलाइन व्यवस्था दी है, जिसके जरिए परिवार के सदस्य मृतक के आधार को डीएक्टिवेट कराने की प्रक्रिया घर बैठे शुरू कर सकते हैं।
myAadhaar पर दर्ज करें मृत्यु, UIDAI करेगा डीएक्टिवेट
12 अंकों का आधार नंबर हर भारतीय नागरिक के लिए एक विशिष्ट पहचान है, जो बैंक खातों, सिम कार्ड, प्रॉपर्टी और सरकारी सब्सिडी से सीधे जुड़ा होता है। यदि किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसका आधार रिकॉर्ड एक्टिव रहता है, तो साइबर जालसाज उस पहचान का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सिम जारी करवा सकते हैं या अन्य संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं। UIDAI ने इस खतरे को भांपते हुए myAadhaar पोर्टल पर ‘परिवार के सदस्य की मृत्यु की सूचना दें’ (Report death of family member) सर्विस शुरू की है।

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए सूचना देने वाले परिजन को सबसे पहले अपने आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के जरिए पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। इसके बाद उन्हें मृतक का आधार नंबर और आधिकारिक मृत्यु पंजीकरण संख्या (Death Registration Number) दर्ज कर आगे बढ़ना होता है।
फर्जी लोन और बैंक फ्रॉड से बचेगा परिवार
मृतक का आधार समय पर डीएक्टिवेट न कराने का सीधा नुकसान परिवार की वित्तीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में सिर्फ आधार और पैन के दुरुपयोग से कई फर्जी लोन ऐप्स के जरिए कर्ज ले लिए जाते हैं, जिनकी रिकवरी का दबाव बाद में शोक संतप्त परिजनों पर पड़ता है। इतना ही नहीं, बैंक खातों, डीमैट खातों और पेंशन योजनाओं में फर्जी क्लेम दाखिल करने की आशंका भी बनी रहती है।
जब परिवार myAadhaar पर मृत्यु की सूचना दर्ज करा देता है, तो सिस्टम में उस आधार से जुड़े सभी बायोमेट्रिक और ओटीपी आधारित ऑथेंटिकेशन को ब्लॉक करने का रास्ता साफ हो जाता है। इससे न सिर्फ मृतक की जमा पूंजी और पेंशन सुरक्षित रहती है, बल्कि परिवार किसी भी अनचाहे कानूनी पचड़े या आर्थिक धोखाधड़ी से पूरी तरह महफूज हो जाता है।
डेथ सर्टिफिकेट करें अपलोड, SRN से जांचें स्टेटस
इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए परिजनों के पास कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार होने चाहिए। सबसे पहले नगर निगम या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी डेथ सर्टिफिकेट की साफ स्कैन कॉपी अपलोड करनी होती है। साथ ही मृतक का डेमोग्राफिक विवरण (जैसे नाम, जन्मतिथि और पता) भी रिकॉर्ड से मेल खाना चाहिए। दस्तावेज अपलोड करने और फॉर्म सबमिट करने के बाद सिस्टम स्क्रीन पर एक ‘सर्विस रिक्वेस्ट नंबर’ (SRN) जनरेट करता है।

इस नंबर को भविष्य के लिए संभाल कर रखना जरूरी है, क्योंकि इसी की मदद से पोर्टल पर एप्लीकेशन स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है। ध्यान रहे कि आवेदन जमा करते ही आधार तुरंत बंद नहीं होता है; UIDAI की टीम नगर निकाय और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के मृत्यु रिकॉर्ड से मिलान कर वेरिफिकेशन पूरा करती है, जिसके बाद डीएक्टिवेशन की कार्रवाई पूरी की जाती है। किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी होने पर नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन 1947 पर संपर्क कर सकते हैं।








