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दिल्ली में प्रदर्शन से 2000 करोड़ का नुकसान, व्यापारियों ने कहा – दिल्ली को बख्श दीजिए

दिल्ली में प्रदर्शन के चलते बाजारों में तालाबंदी से 2,000 करोड़ का नुकसान हुआ। सीटीआई ने दिवाली तक धरने रोकने और दूसरे शहर चुनने की मांग की है।

Delhi market shutdown trade loss

मुख्य बातें

  • दिवाली तक राजनीतिक दल दूसरे शहरों में करें प्रदर्शन: सीटीआई
  • शनिवार को बाजार बंदी से दिल्ली में 2000 करोड़ डूबे
  • चांदनी चौक और सदर बाजार समेत प्रमुख व्यापारिक केंद्र ठप

नई दिल्ली (11 अक्टूबर) : नवरात्रि और रामलीला के आगाज के साथ शुरू हुए त्योहारी सीजन के पहले ही दिन दिल्ली के कारोबारी सड़क पर आ गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शनिवार को हुए उग्र प्रदर्शन और इसके चलते प्रमुख थोक व खुदरा बाजारों में हुई जबरन तालाबंदी ने एक ही झटके में राजधानी को 2,000 करोड़ रुपये की चोट दी है।

इस भारी नुकसान से आक्रोशित व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने सभी राजनीतिक दलों को दो-टूक चिट्ठी लिखकर मांग की है कि दिवाली तक दिल्ली को राजनीतिक अखाड़ा न बनाया जाए और धरने किसी दूसरे शहर में किए जाएं।

दिवाली तक दूसरे शहर जाएं सभी राजनीतिक प्रदर्शन

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने सीजेपी नेता अभिजीत दीपके समेत देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को औपचारिक पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि त्योहारों का समय राजधानी की आर्थिक रीढ़ है। सीटीआई का कहना है कि यह समय दिल्ली के 20 लाख पंजीकृत व गैर-पंजीकृत व्यापारियों के लिए पूरे साल का सबसे बड़ा कारोबारी मौका होता है।

गोयल ने दो-टूक शब्दों में कहा कि अगर राजनीतिक दलों की आपसी खींचतान के चलते बाजारों में आवाजाही रोकी गई, तो दिल्ली की पूरी अर्थव्यवस्था धड़ाम हो जाएगी। संगठन ने दलों से अपील की है कि अगर प्रदर्शन करना इतना ही अपरिहार्य है, तो इसके लिए दिल्ली की जगह देश के किसी अन्य शहर का रुख करें ताकि राजधानी का त्योहारी व्यापार बच सके।

सीईसी विवाद में पिसते दिल्ली के बीस लाख व्यापारी

विवाद की मुख्य वजह निर्वाचन सदन के घेराव का आह्वान था, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन ने एहतियातन मध्य और पुरानी दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया। मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद होने और प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग लगने के कारण सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट में शटर पूरी तरह गिरे रहे।

आम दिनों में दूसरे राज्यों से रोजाना 3 से 4 लाख थोक खरीदार दिल्ली पहुंचते हैं, लेकिन जाम और उपद्रव के डर से यह आवाजाही शून्य पर पहुंच गई। स्थानीय ग्राहकों ने भी सुरक्षा चिंताओं के चलते घरों में रहना ही सुरक्षित समझा, जिससे शनिवार का पूरा कारोबारी दिन बर्बाद हो गया।

रामलीला और त्योहारी व्यापार पर पड़ा सीधा असर

बाजारों की इस बंदी की मार केवल कपड़े या पटाखों के व्यापारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सर्विस और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कमर भी टूट गई। शनिवार को पेट्रोल पंप खाली पड़े रहे, होटलों और रेस्टोरेंटों में बुकिंग रद्द हुईं और सैलून-सिनेमा हॉल से ग्राहक गायब रहे। इसके अलावा, राजधानी में शुरू हो रहीं 650 रामलीलाओं से जुड़े लाखों टेंट, लाइट, साउंड और मंच कलाकारों की आजीविका पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

सीटीआई ने चेताया है कि यदि रास्ते बंद करने का यह सिलसिला जारी रहा, तो आम जनता रामलीलाओं और मेलों से दूरी बना लेगी, जिसका सीधा असर दिल्ली के कमजोर तबके के रोजगार पर पड़ेगा।

Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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