बलरामपुर (10 अक्टूबर): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से सीधे विधानसभा चुनाव लड़ने की खुली सियासी चुनौती दे डाली। बलरामपुर के रेहरा बाजार स्थित बिलरिया गांव में 803 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि अखिलेश यादव ‘चेलों’ को आगे करने के बजाय खुद अयोध्या से नामांकन दाखिल करें, वह भी उनके खिलाफ उसी सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे।
अयोध्या से नामांकन करें अखिलेश, मैं भी लड़ूंगा चुनाव
मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी दंगल का रुख अयोध्या की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या उनकी गहरी आस्था का केंद्र है और वहां जारी विकास कार्यों की जमीनी हकीकत परखने के लिए वह लगातार अयोध्या का दौरा करते हैं। सपा प्रमुख पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब मुकाबला होना ही है, तो फिर दो-दो हाथ आमने-सामने होने चाहिए, चेलों के पीछे छिपने की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर रामनगरी की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के दौर में अयोध्या को महज तीन से चार घंटे बिजली नसीब होती थी और विकास कार्यों में जानबूझकर रोड़े अटकाए जाते थे। आज भाजपा सरकार में अयोध्या का कायाकल्प हो चुका है और वह त्रेतायुग के वैभव को दर्शा रही है। मुख्यमंत्री ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दावा किया कि जनता के समर्थन से एनडीए गठबंधन 80 फीसदी से अधिक सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा, जबकि समूचा विपक्ष 20 फीसदी सीटों के भीतर सिमट कर रह जाएगा।
पीडीए यानी परिवार विकास
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के चर्चित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की नई सियासी व्याख्या करते हुए इसे ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ और ‘प्रदेश डुबाऊ अलायंस’ करार दिया। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में सपा के टिकट बंटवारे की याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने दलितों और पिछड़ों के हक पर डाका डाला है। एक सीट परिवार के सदस्य को सौंपी गई, जबकि दूसरी सीट धनबल के आधार पर बांटी गई। उन्होंने कहा कि सपा के सियासी शब्दकोश में परिवार के बाहर किसी भी योग्य कार्यकर्ता के लिए कोई जगह नहीं है।
विपक्षी दलों के चुनावी रवैये पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सपा और कांग्रेस चुनाव जीतती हैं तो उसे अपना कथित पुरुषार्थ बताती हैं, लेकिन जनता के नकारे जाने पर ठीकरा सीधे ईवीएम पर फोड़ देती हैं। हार की खीझ में संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और अदालतों पर भी बेबुनियाद टिप्पणियां की जाती हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि प्रदेश में अब दंगाइयों और भ्रष्टाचारियों का दौर खत्म हो चुका है और कानून से खिलवाड़ करने की किसी को इजाजत नहीं मिलेगी।
सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट
नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासन को अवैध घुसपैठ, तस्करी और उपद्रवियों पर नकेल कसने के कड़े निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक चेतावनी दी कि सीमावर्ती बेल्ट में किसी भी ‘छांगुर’ जैसे अराजक तत्व को पनपने नहीं दिया जाएगा और न ही इलाके की जनसांख्यिकी से छेड़छाड़ बर्दाश्त होगी। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति तय है; ऐसे अपराधियों के लिए सिर्फ जेल या जहन्नुम का ही रास्ता बचेगा।
प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया कि प्रदेश में किसी भी प्राकृतिक आपदा या मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर सरकारी मुआवजा मुहैया कराया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्रों को लैपटॉप, महिला समूहों को 45 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक और युवाओं को स्वरोजगार के स्वीकृति पत्र भी सौंपे। इसके साथ ही उन्होंने जिले में मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय और अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज के जरिए स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने का खाका पेश किया।




