रामपुर/लखनऊ (10 अक्टूबर): गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक संबल देने के लिए संचालित प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) में रामपुर जिले ने पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। बीते एक वर्ष के भीतर जिले में रिकॉर्ड 1 लाख 79 हजार नए आयुष्मान कार्ड बनाए गए। इस बड़ी उपलब्धि के लिए राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर प्रशासन को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न सौंपकर सम्मानित किया।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने रामपुर को किया सम्मानित
लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने योजना के क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के हर पात्र व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाना सरकार का संकल्प है। रामपुर जिले ने तय समय सीमा के भीतर वृहद स्तर पर अभियान चलाकर प्रदेश के बाकी जिलों को पीछे छोड़ दिया। पिछले एक साल में 1.79 लाख कार्ड तैयार कर रामपुर ने साबित किया कि यदि प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय रहे तो अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाया जा सकता है।
विभागों के बेहतर समन्वय से बना यह बड़ा रिकॉर्ड
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, जिले में स्वास्थ्य, राजस्व और पंचायती राज विभाग के संयुक्त समन्वय से ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए गए। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने घर-घर जाकर पात्र परिवारों का सत्यापन किया, जिससे कार्ड बनाने की प्रक्रिया में तेजी आई। अब तक जिले में कुल 6,91,928 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। प्रशासन ने तकनीकी दिक्कतों को दूर करते हुए उन परिवारों को प्राथमिकता दी जो पात्रता सूची में होने के बावजूद अब तक कार्ड नहीं बनवा सके थे।
जनता दर्शन में डीएम ने पीड़ितों को सौंपे कार्ड
कागजी दावों से इतर योजना का सीधा लाभ धरातल पर दिखाने के लिए जिलाधिकारी ने जनता दर्शन में आए गंभीर मरीजों और दिव्यांगों को मौके पर ही आयुष्मान कार्ड वितरित किए। इनमें टांडा तहसील के ग्राम पोयली नायक निवासी कैंसर पीड़ित केविन्दर सिंह और पैर की सर्जरी का इंतजार कर रहे मिलक तहसील के राजकुमार माहेश्वरी शामिल रहे। इसके अलावा स्वार तहसील के 100 प्रतिशत दिव्यांग हेमराज और प्रेमशंकर को भी कार्ड सौंपे गए, जिससे वे सूचीबद्ध अस्पतालों में प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज करा सकें।









