नई दिल्ली (28 अक्टूबर) : भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों में सफर के दौरान आग लगने जैसी अप्रत्याशित घटनाओं को रोकने के लिए एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में रात 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक मोबाइल और पावर बैंक चार्जिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। बोर्ड ने इन छह घंटों के दौरान सभी डिब्बों में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट को बंद रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी तरह के बड़े खतरे से बचा जा सके।
पावर बैंक फटने के बाद रेलवे का कड़ा फैसला
यह सख्त नियम दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) और मुंबई-हावड़ा मेल जैसी हालिया गंभीर घटनाओं के बाद लागू किया गया है। इन मामलों में यात्रा के दौरान चार्ज हो रहे एक यात्री का पावर बैंक अचानक फट गया था और उससे भारी धुआं निकलने लगा था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि ट्रेन को बांदामुंडा स्टेशन के पास कुछ मिनटों के लिए रोकना पड़ा था। रेलवे बोर्ड का मानना है कि रात के समय ज्यादातर यात्री गहरी नींद में होते हैं, ऐसे में ओवरहीटिंग या शॉर्ट सर्किट जैसी तकनीकी खराबी का समय पर पता नहीं चल पाता है।
थर्मल रनअवे और बैटरी फटने का बड़ा खतरा
तकनीकी जानकारों के अनुसार, पॉवर बैंक और स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन या लिथियम-पॉलिमर बैटरी होती हैं। यदि कोई बैटरी क्षतिग्रस्त हो जाए, बहुत अधिक गर्म हो जाए या उसमें इंटरनल शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो ‘थर्मल रनअवे’ की खतरनाक स्थिति पैदा हो जाती है। इसके कारण बैटरी का तापमान तेजी से बढ़ता है, धुआं निकलता है और कई बार विस्फोट तक हो जाता है। ट्रेन जैसी सीमित और बंद जगह में यदि ऐसा हादसा होता है, तो यात्रियों में भगदड़ मच सकती है और बच्चों व बुजुर्गों के लिए निकलना मुश्किल हो सकता है।
औचक निरीक्षण और नियमों का सख्ती से पालन
ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए रेलवे बोर्ड ने क्षेत्रीय अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को ट्रेनों में औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। ऑन-ड्यूटी स्टाफ यह सुनिश्चित करेगा कि रात के तय समय में चार्जिंग प्वाइंट बंद रहें और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए। इसके साथ ही, रेलवे ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे सफर के दौरान सही चार्जर और केबल का इस्तेमाल करें तथा अपने उपकरणों को तकिए या बिस्तर के पास रखकर चार्ज करने से बचें।




