देहरादून। (Dehradun Land Fraud) देहरादून के पॉश इलाकों और आसपास की कीमती जमीनों पर बाहरी राज्यों के बिल्डर्स और स्थानीय भू-माफियाओं ने तहलका मचा रखा था। ताजा मामला आमवाला तरला का है, जहाँ PACL (पर्ल्स एग्रो टेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी प्रतिबंधित भूमि को फर्जी कागजात तैयार कर ठिकाने लगा दिया गया।
जिलाधिकारी के संज्ञान में आते ही इस पूरे खेल की चूलें हिल गई हैं। जाँच में सामने आया कि विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 के जरिए कोर्ट की रोक के बावजूद रजिस्ट्री करा दी गई।
सब-रजिस्ट्रार दफ्तर के भीतर तक पहुँची जाँच की आंच

डीएम ने इस मामले में केवल बाहरी लोगों पर ही नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे सफेदपोशों पर भी नकेल कस दी है। सब-रजिस्ट्रार देहरादून की कार्यप्रणाली अब रडार पर है।
आदेश दिए गए हैं कि यदि इन फर्जी रजिस्ट्रियों के आधार पर कोई भी दाखिल-खारिज हुआ है, तो उसे तत्काल कूड़ेदान के हवाले किया जाए। रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 83 के तहत मुकदमा दर्ज कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
भू-माफियाओं की शामत, सरकारी जमीन पर ‘स्ट्राइक’
उत्तराखंड की शांत वादियों में जमीन जिहाद और अवैध कब्जों को लेकर प्रशासन अब ‘जीरो टॉलरेंस’ मोड में है। चंडीगढ़ और पंजाब के सिंडिकेट जो यहाँ की सरकारी जमीनों पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठे हैं, उनके खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और कूटरचित दस्तावेज बर्दाश्त नहीं होंगे। जल्द ही देहरादून रजिस्ट्री दफ्तर में बड़ा प्रशासनिक छापा पड़ सकता है, जिससे बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।









