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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में ‘कामचलाऊ’ इंतजाम, CEO पद पर स्थायी नियुक्ति की उठी मांग

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी की स्थायी नियुक्ति न होने पर विवाद खड़ा हो गया है। रुद्रप्रयाग डीएम को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने और प्रशासनिक पदों के खाली होने से चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में 'कामचलाऊ' इंतजाम, CEO पद पर स्थायी नियुक्ति की उठी मांग

HIGHLIGHTS

  • रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को बीकेटीसी सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
  • बोर्ड ने सीईओ पद के लिए 'प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी' की अनिवार्यता हटाने का प्रस्ताव दिया है।
  • समिति में एडिशनल सीईओ और डिप्टी सीईओ समेत कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद लंबे समय से रिक्त हैं।

देहरादून। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने वाली है, लेकिन बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ है। सरकार ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर किसी पूर्णकालिक अधिकारी की तैनाती करने के बजाय रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को इसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी है।

इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सरकार की मंशा पर सवाल दाग दिए हैं।

रुद्रप्रयाग जिला केदारनाथ यात्रा का मुख्य केंद्र है, जहां इस समय यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में जिले की कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन संभालने वाले जिलाधिकारी को बीकेटीसी की कमान देना तर्कसंगत नहीं लग रहा है। बदरीनाथ धाम चमोली जिले में स्थित है, जिससे दो अलग-अलग जिलों के बीच समन्वय बिठाना एक अकेले अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।

सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। नेगी का तर्क है कि जब राज्य सरकार के पास वरिष्ठ पीसीएस और आईएएस अधिकारियों की बड़ी फौज मौजूद है, तो बीकेटीसी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को ‘अंशकालिक’ भरोसे क्यों छोड़ा जा रहा है? उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी की स्थायी नियुक्ति नहीं हुई, तो वे इसका विरोध करेंगे।

हैरानी की बात यह है कि बीकेटीसी बोर्ड ने 9 जुलाई 2025 की अपनी बैठक में सीईओ पद की अर्हताओं में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। 2023 की सेवा नियमावली के तहत इस पद के लिए ‘प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी’ होना अनिवार्य था, जिसे बोर्ड अब “एकांगी” और “अनुकूल नहीं” बता रहा है। बोर्ड का तर्क है कि 1985 की पुरानी नियमावली में केवल स्नातक डिग्री ही काफी थी।

नेगी ने आरोप लगाया है कि बोर्ड जानबूझकर योग्यता के मानकों को कम करना चाहता है ताकि पसंदीदा व्यक्तियों को इस कुर्सी पर बैठाया जा सके। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि तिरुपति बालाजी या वैष्णो देवी जैसे बड़े श्राइन बोर्डों में प्रबंधन के लिए आईएएस स्तर के अधिकारी तैनात होते हैं, जबकि उत्तराखंड सरकार इसे हल्के में ले रही है।

इसके अलावा, विशेष पूजाओं के लिए 11 लाख रुपये का न्यूनतम शुल्क तय करने के प्रस्ताव को भी धार्मिक स्थलों के व्यवसायीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

बीकेटीसी में केवल सीईओ ही नहीं, बल्कि एडिशनल सीईओ, डिप्टी सीईओ और केदारनाथ के कार्याधिकारी जैसे प्रमुख पद भी खाली पड़े हैं। हाल के वर्षों में यह संस्थान विवादों से घिरा रहा है। 2024 में मंडी समिति के सचिव विजय प्रसाद थपलियाल की नियुक्ति पर भी भारी बवाल हुआ था।

उनके कार्यकाल में केदारनाथ की रूप छड़ी को बिना अनुमति महाराष्ट्र ले जाने और पुजारियों की नियुक्तियों में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद मार्च 2026 में उन्हें वापस उनके मूल विभाग भेज दिया गया।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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