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DM Savin Bansal Raid : गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित जमीन पर कर दीं 150 रजिस्ट्रियां, अब नपेंगे अधिकारी

देहरादून जिलाधिकारी सविन बंसल की जांच रिपोर्ट के बाद विकासनगर सब-रजिस्ट्रार अपूर्वा सिंह के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। निरीक्षण में गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित भूमि की 150 अवैध रजिस्ट्रियां और करोड़ों रुपये की स्टाम्प चोरी के गंभीर मामले सामने आए हैं।

DM Savin Bansal Raid : गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित जमीन पर कर दीं 150 रजिस्ट्रियां, अब नपेंगे अधिकारी

HIGHLIGHTS

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन की 150 अवैध रजिस्ट्रियां पकड़ी गईं।
  • वर्ष 2018 से 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख पत्र (रजिस्ट्री दस्तावेज) कार्यालय में डंप मिले।
  • स्टाम्प चोरी के 47 नए मामले चिन्हित, पूर्व में तैनात अधिकारियों की भी शुरू होगी जांच।

विकासनगर, 14 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। विकासनगर तहसील स्थित उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में करोड़ों रुपये के स्टाम्प घोटाले और अवैध भू-सौदों का बड़ा मामला सामने आया है।

जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण और उसके बाद हुई जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन को उप-निबंधक अपूर्वा सिंह के निलंबन और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भेजी गई है। जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘गोल्डन फॉरेस्ट’ की प्रतिबंधित भूमि को लेकर हुआ है, जहां सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद 150 अवैध रजिस्ट्रियां कर दी गईं।

प्रतिबंधित भूमि और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन

जिलाधिकारी सविन बंसल ने निरीक्षण के दौरान पाया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित की गई गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि पर नियम विरुद्ध तरीके से रजिस्ट्रियां की जा रही थीं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, कार्यालय ने 150 ऐसी रजिस्ट्रियां कीं जो पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।

इस खेल में न केवल राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई, बल्कि जमीन खरीदने वाले आम लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की स्थिति पैदा हुई है। डीएम ने इस मामले में तत्कालीन कर्मचारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना है और उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

दफ्तर में डंप मिले 7 साल पुराने दस्तावेज

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम को कार्यालय के रखरखाव में भारी लापरवाही मिली। साल 2018 से लेकर 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख पत्र (ओरिजिनल डीड) कार्यालय में ही डंप पाए गए, जिन्हें नियमानुसार आवेदकों को मिल जाना चाहिए था। बिना किसी वैध कारण के 25 ऐसी रजिस्ट्रियां भी मिलीं जो वर्षों से रोक कर रखी गई थीं। इन दस्तावेजों के लंबित रहने के पीछे किसी बड़े भ्रष्टाचार या ‘लेनदेन’ की आशंका जताई जा रही है, जिस पर कार्यालय के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

करोड़ों की स्टाम्प चोरी और पूर्व अधिकारियों पर शिकंजा

जांच टीम ने धारा 47-ए के तहत स्टाम्प शुल्क चोरी से संबंधित 47 नए प्रकरण चिन्हित किए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का मामला है। डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि केवल वर्तमान स्टाफ ही नहीं, बल्कि 2018 के बाद से यहां तैनात रहे सभी सब-रजिस्ट्रारों के कार्यकाल की गहन जांच की जाएगी। स्टाम्प अपवंचन (Tax Evasion) के जो मामले डीएम कार्यालय को भेजे जाने चाहिए थे, वे या तो बेहद कम थे या प्रक्रियागत रूप से अधूरे रखे गए थे ताकि चोरी पकड़ी न जा सके।

प्रशासनिक कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी ने कार्यालय के महत्वपूर्ण अभिलेखों को कब्जे में लेकर विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी है। इस खुलासे के बाद जिले के अन्य रजिस्ट्री कार्यालयों में भी हड़कंप मच गया है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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