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Badrinath Glacier Break : बदरीनाथ धाम के पास कंचनगंगा में टूटा ग्लेशियर, बर्फ का सैलाब देख सहमे लोग

बदरीनाथ धाम के करीब कंचनगंगा क्षेत्र में एक बड़ा ग्लेशियर टूटकर नीचे आ गिरा। चमोली पुलिस और प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

Badrinath Glacier Break : बदरीनाथ धाम के पास कंचनगंगा में टूटा ग्लेशियर, बर्फ का सैलाब देख सहमे लोग

HIGHLIGHTS

  • कंचनगंगा क्षेत्र में पहाड़ से ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया।
  • चमोली एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने जनहानि या नुकसान की खबरों का किया खंडन।
  • हर साल गर्मियों में तापमान बढ़ने पर नीचे की ओर खिसकता है यह ग्लेशियर।
  • पिछले साल फरवरी में माणा के पास हुए एवलांच में 8 लोगों की जा चुकी है जान।

चमोली, 24 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र से एक बड़ी खबर है। बदरीनाथ धाम (Badrinath Glacier Break) के करीब स्थित कंचनगंगा इलाके में एक विशाल ग्लेशियर टूटकर तेजी से नीचे आ गिरा। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। पुलिस और प्रशासन ने हालात पूरी तरह सामान्य होने की पुष्टि की है।

चमोली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुरजीत सिंह पंवार ने घटना को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि ग्लेशियर टूटने से क्षेत्र में कोई क्षति नहीं हुई है। एसपी के मुताबिक, यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और हर साल यह ग्लेशियर धीरे-धीरे खिसकता हुआ कंचनगंगा क्षेत्र में आकर रुक जाता है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है।

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें कंचनगंगा के ऊपरी हिस्से से बर्फ का बड़ा हिस्सा तेजी से नीचे की ओर खिसकता नजर आ रहा है। हिमालयी इलाकों में इन दिनों दिन के समय तेज धूप और रात में तापमान गिरने की वजह से ग्लेशियरों में दरारें आ रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ पिघलने और खिसकने की घटनाएं आम हो जाती हैं।

पूर्व में भी हो चुकी हैं एवलांच की घटनाएं (Badrinath Glacier Break)

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर खिसकने का पुराना इतिहास रहा है। पिछले साल अक्टूबर 2025 में भी कंचनगंगा के पास ही इसी तरह ग्लेशियर खिसकने की घटना हुई थी, जिसमें कोई नुकसान नहीं हुआ था।

हालांकि, फरवरी 2025 में बदरीनाथ से आगे चीन सीमा से सटे माणा गांव के पास एक बड़ा हिमस्खलन हुआ था। इस दर्दनाक हादसे में काम कर रहे 54 मजदूर बर्फ में दब गए थे। तब भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 46 लोगों की जान बचाई थी, जबकि 8 लोगों की मौत हो गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन ऊंचाई वाले इलाकों में हो रही हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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