देहरादून (23 अक्टूबर) : उत्तराखंड में गुणवत्ताविहीन नर्सिंग संस्थानों और डिग्री की दुकानों पर नकेल कसते हुए धामी सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों के मनमाने नर्सिंग पाठ्यक्रमों पर बड़ा प्रहार किया है। सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में संपन्न उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एम्पावर्ड कमेटी) की बैठक में निजी विश्वविद्यालयों की ओर से नर्सिंग कोर्स शुरू करने के लिए आए 73 आवेदनों की पड़ताल की गई, जिसमें प्राथमिक स्क्रूटनी के दौरान ही 67 आवेदन तकनीकी व आधारभूत मानकों पर फेल होकर बाहर हो गए।
समिति के समक्ष विचार के लिए पहुंचे महज 6 योग्य आवेदनों में से भी केवल 5 निजी विश्वविद्यालयों को नर्सिंग पाठ्यक्रम चलाने की हरी झंडी दी गई, जबकि एक आवेदन को पुनर्परीक्षण के लिए सुरक्षित रख लिया गया।
मानकों की अनदेखी पर 68 निजी कॉलेज बाहर
सचिवालय में आयोजित एम्पावर्ड समिति की बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण देते हुए साफ किया कि प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। कुल 73 संस्थानों ने नर्सिंग कोर्स के संचालन की अनुमति मांगी थी, लेकिन सख्त जांच में 93 फीसदी संस्थान इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) और राज्य सरकार के बुनियादी ढांचे, फैकल्टी अनुपात और संबद्ध अस्पतालों के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
मुख्य सचिव ने दो-टूक कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए तय सभी शैक्षणिक, आधारभूत एवं क्लीनिकल मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनिवार्य लैब, विशेषज्ञ फैकल्टी और पर्याप्त बेड क्षमता वाले अस्पतालों के किसी भी निजी संस्थान को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
अस्पतालों में प्रति बेड नर्सिंग स्टाफ अनिवार्य
निजी विश्वविद्यालयों पर शिकंजे के साथ ही मुख्य सचिव ने प्रदेश के निजी अस्पतालों में भी मरीजों की जान से होने वाले समझौतों पर सख्त रुख अख्तियार किया है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्य के सभी निजी अस्पतालों में प्रति बेड तय मानकों के अनुसार ही ट्रेंड नर्सेज और वार्ड बॉय की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
अक्सर निजी अस्पताल खर्च बचाने के लिए अप्रशिक्षित स्टाफ रखते हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके समाधान के लिए प्रदेश में कार्यरत मेडिकल मानव संसाधन का एक केंद्रीकृत व्यवस्थित ‘डाटा बैंक’ तैयार किया जाएगा। इसके तहत सभी बड़े मेडिकल कॉलेजों व निजी संस्थानों में कार्यरत नर्सिंग व पैरामेडिकल कर्मियों की योग्यता, विशेषज्ञता और कौशल का सटीक रिकॉर्ड दर्ज होगा।
पांच सौ स्वास्थ्य कर्मियों को विदेश भेजने की तैयारी
मानकों को दुरुस्त करने के साथ ही सरकार ने उत्तराखंड के ट्रेंड नर्सिंग एवं पैरामेडिकल युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दरवाजे खोलने की कार्ययोजना पर मुहर लगाई है। वित्तीय वर्ष 2027-28 तक प्रदेश के 500 योग्य नर्सेज एवं वार्ड बॉय को विदेशों में सम्मानजनक रोजगार दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए पश्चिम एशिया, पश्चिमी यूरोप, एस्टोनिया और खाड़ी देशों में नर्सिंग स्टाफ की भारी मांग का आकलन किया जा रहा है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन देशों की भाषा दक्षता (जैसे OET/IELTS या जर्मन), कार्य संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय क्लीनिकल प्रोटोकॉल के मुताबिक राज्य के युवाओं को विशेष स्किलिंग व ब्रिज कोर्स कराए जाएं, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सीधे चयनित हो सकें।




