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उत्तराखंड में 1 अप्रैल से घर-घर दस्तक देंगे बीएलओ, क्या आपकी वोटर मैपिंग हो गई?

उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले निर्वाचन आयोग ने 85.50% मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली है, जबकि 1 अप्रैल से कम प्रतिशत वाले जिलों में सघन अभियान शुरू होगा. मतदाताओं की सुविधा के लिए 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' सेवा शुरू की गई है, जिससे वोटर घर बैठे पंजीकरण संबंधी सहायता ले सकेंगे.

उत्तराखंड में 1 अप्रैल से घर-घर दस्तक देंगे बीएलओ, क्या आपकी वोटर मैपिंग हो गई?

HIGHLIGHTS

  • बागेश्वर 98.76% मैपिंग के साथ प्रदेश में अव्वल, जबकि राजधानी देहरादून 75.09% के साथ सबसे पीछे.
  • 1 अप्रैल से प्रदेश के पिछड़ रहे जिलों में घर-घर सत्यापन का विशेष आउटरीच अभियान शुरू किया जाएगा.
  • मई-जून 2026 में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा होने की संभावना.

देहरादून: उत्तराखंड निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की मतदाता सूची को चाक-चौबंद करने के लिए कमर कस ली है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले चल रही प्री-एसआईआर प्रक्रिया में अब तक राज्य के 85.50% मतदाताओं की डिजिटल मैपिंग का काम पूरा किया जा चुका है. पिछले साल दिसंबर से शुरू हुई इस कसरत के तहत 27 मार्च 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि विभाग अब शत-प्रतिशत लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने साफ कर दिया है कि 1 अप्रैल से उन जिलों में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ मोड में अभियान चलाया जाएगा, जहां मैपिंग की रफ्तार सुस्त है. विभाग का मुख्य फोकस देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों पर है. इन इलाकों में आबादी के बढ़ते दबाव और वोटरों की आवाजाही के कारण मैपिंग का ग्राफ उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाया है.

आयोग ने तकनीक का सहारा लेते हुए ‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ (Book a Call with BLO) की अनूठी पहल की है. अब किसी भी मतदाता को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. मतदाता सीधे https://voters.eci.gov.in पर जाकर या ECI-NET मोबाइल ऐप के जरिए अपनी अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं. कॉल बुक होने के महज 48 घंटों के भीतर संबंधित बीएलओ खुद मतदाता से संपर्क साधेगा.

जिलों की रिपोर्ट कार्ड: बागेश्वर टॉप पर, देहरादून फिसड्डी

राज्य के कुल 81,84,092 मतदाताओं में से अब तक 69,97,131 की मैपिंग हो चुकी है. जिलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पहाड़ों में काम तेजी से हुआ है, जबकि मैदानी जिलों में चुनौती बरकरार है.

जिला कुल मतदाता मैपिंग संख्या प्रतिशत
बागेश्वर 2,15,389 2,12,727 98.76%
अल्मोड़ा 5,30,784 4,96,479 93.54%
चंपावत 2,06,890 1,92,558 93.07%
उत्तरकाशी 2,44,113 2,25,873 92.53%
रुद्रप्रयाग 1,91,655 1,77,029 92.37%
हरिद्वार 14,08,051 12,38,761 87.98%
उधम सिंह नगर 13,72,707 10,69,644 77.92%
देहरादून 14,82,711 11,13,296 75.09%

इस प्रक्रिया में ‘ASD’ सूची (Absent, Shifted, Death) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. आयोग का लक्ष्य है कि फर्जी या मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाकर इसे पूरी तरह शुद्ध बनाया जाए.

राजनीतिक दलों की सुस्ती और IT वॉलिंटियर्स का सहारा

निर्वाचन प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी अभी भी कमजोर दिख रही है. प्रदेश के 11,733 पोलिंग बूथों के लिए अभी तक केवल 19,116 बूथ लेवल एजेंट (BLA) ही नियुक्त हो पाए हैं. आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी ने 9,276 और कांग्रेस ने 9,506 बीएलए-2 तैनात किए हैं, जबकि सीपीआई (एम) और बीएसपी की संख्या बेहद कम है.

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक, मैदानी जिलों में 2003 की तुलना में 2025-26 तक मतदाताओं की संख्या में भारी उछाल आया है. रोजगार और शिक्षा के लिए पलायन कर आए लोगों तक पहुंचना बीएलओ के लिए अकेले संभव नहीं है, इसलिए राजनीतिक दलों से बीएलए नियुक्त करने का आग्रह किया गया है.

इसके अलावा, तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए हर बूथ पर ‘IT वॉलिंटियर्स’ की तैनाती पर विचार किया जा रहा है, जो डिजिटलाइजेशन के काम में मदद करेंगे.


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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