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देहरादून के दून अस्पताल में नवजात बदलने के आरोप से हड़कंप, पर्चे पर ‘बेटा’ बताकर थमाई ‘बेटी’

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 29 Aug 2026 04:03 PM IST

देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात बदलने के गंभीर आरोप लगे हैं। पर्चे पर मेल चाइल्ड दर्ज होने के बावजूद लड़की सौंपने पर परिजनों ने मंत्री सुबोध उनियाल से डीएनए जांच की गुहार लगाई।

newborn baby swap allegation Uttarakhand

मुख्य बातें

  • 24 अगस्त को ऑपरेशन के बाद मिले दस्तावेज में नवजात का लिंग 'मेल' दर्ज था।
  • डिस्चार्ज और सुपुर्दगी के समय परिजनों को बेटे के बजाय बच्ची सौंप दी गई।
  • पीड़ित पिता सुमित कुमार ने ओटी के बाहर और वार्ड की सीसीटीवी फुटेज मांगी।
  • अस्पताल प्रबंधन की बेरुखी के बाद स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से लगाई गई न्याय की गुहार।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को निष्पक्ष जांच और जरूरत पड़ने पर डीएनए टेस्ट के निर्देश दिए।

दून हॉराइज़न, देहरादून (29 अगस्त): राजधानी के सबसे बड़े सरकारी दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Doon Medical College Hospital) में एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला गरमा गया है। प्रसव के बाद मिले आधिकारिक रिकॉर्ड में लड़का दर्ज होने और बाद में परिवार को बच्ची सौंपे जाने के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया।

मामले की गंभीरता तब सामने आई जब शनिवार को अस्पताल के औचक निरीक्षण पर पहुंचे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के सामने पीड़ित परिवार फफक पड़ा।

पर्चे पर ‘मेल’ और गोद में थमाई बच्ची 

पीड़ित सुमित कुमार के अनुसार, उनकी पत्नी नियमित जांच के लिए अस्पताल आ रही थीं। प्रसव पीड़ा की संभावना को देखते हुए चिकित्सकों ने 22 अगस्त को महिला को वार्ड में भर्ती कर लिया। पहले सामान्य प्रसव (Normal Delivery) की बात कही गई थी। हालांकि, 24 अगस्त को स्थिति जटिल बताते हुए डॉक्टरों ने परिजनों से सहमति लेकर सिजेरियन ऑपरेशन (Cesarean Section) करने का फैसला लिया।

सुमित का सीधा आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से बाहर आने के बाद उन्हें जो आधिकारिक मेडिकल स्लिप थमाई गई, उसमें बच्चे का लिंग स्पष्ट तौर पर ‘मेल’ (लड़का) दर्ज था। लेकिन बाद में जब नवजात को परिवार को सौंपा गया, तो वह कन्या शिशु थी।

परिवार का कहना है कि जब उन्होंने इस भारी विसंगति पर सवाल उठाए, तो स्टाफ ने गलती मानने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की।

पीड़ित पिता ने सीसीटीवी फुटेज और डीएनए टेस्ट की उठायी मांग

अस्पताल के रवैये से नाराज पीड़ित पिता ने लेबर रूम और कॉरिडोर की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की गुहार लगाई, ताकि यह देखा जा सके कि ऑपरेशन के बाद बच्चे को कहां ले जाया गया था। जब स्थानीय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो परिजनों ने डीएनए प्रोफाइलिंग (DNA Profiling) की मांग तेज कर दी।

सुमित ने स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई। उनका कहना था कि अस्पताल की सामान्य जांच प्रक्रियाएं अक्सर लीपापोती में बदल जाती हैं, इसलिए वैज्ञानिक साक्ष्य ही सच्चाई सामने ला सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को दिए जांच के निर्देश

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मौके पर ही चिकित्सा शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया।

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अस्पताल की साख और एक परिवार के विश्वास का सवाल है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पूरे मामले की समयबद्ध जांच करने और यदि जरूरी हो तो तुरंत डीएनए जांच कराने के कड़े निर्देश दिए।

मंत्री के मुताबिक, किसी भी स्तर पर हुई दस्तावेजी चूक या जानबूझकर की गई अदला-बदली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल स्वास्थ्य महकमे की विशेष टीम ओटी स्टाफ और उस दिन तैनात ड्यूटी डॉक्टरों के रिकॉर्ड खंगालने में जुट गई है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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