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Uttarakhand Kranti Dal : विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे आशुतोष नेगी बाहर, 6 साल के लिए हुए निष्कासित

उत्तराखंड क्रांति दल ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कड़ा कदम उठाते हुए आशुतोष नेगी को 6 साल के लिए बाहर कर दिया है। 2027 चुनाव से पहले रायपुर सीट के सियासी समीकरण बदले।

Uttarakhand Kranti Dal

HIGHLIGHTS

  • आशुतोष नेगी को उत्तराखंड क्रांति दल से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
  • पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उनकी प्राथमिक सदस्यता पूरी तरह रद्द कर दी गई।
  • रायपुर विधानसभा क्षेत्र (Raipur Assembly Seat) से चुनाव की जमीन तैयार कर रहे थे नेगी।
  • केंद्रीय उपाध्यक्ष पद से हटाए जाने के ठीक दो महीने बाद यह अंतिम फैसला आया।

दून हॉराइज़न, देहरादून (29 अगस्त): अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी उत्तराखंड की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सतह पर आ गई है। उत्तराखंड क्रांति दल (Uttarakhand Kranti Dal) ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देकर अपने सक्रिय नेता आशुतोष नेगी को छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस फैसले के साथ ही नेगी की प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है।

कुकरेती की चेतावनी दरकिनार, दो महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन विरोधी रवैये को लेकर केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने नेगी को पहले औपचारिक नसीहत दी थी। निर्देशों की अनदेखी होने पर शीर्ष नेतृत्व ने यह सख्त कदम उठाया।

कार्रवाई की पटकथा दो महीने पहले ही लिखी जाने लगी थी। तब केंद्रीय महामंत्री एवं केंद्रीय कार्यालय प्रभारी देव चंद उत्तराखंडी की ओर से जारी पत्र के जरिए नेगी को केंद्रीय उपाध्यक्ष पद से पदमुक्त किया गया था। पद छीनने के बावजूद संगठन में टकराव थमा नहीं। अंततः पार्टी ने निष्कासन का चाबुक चला दिया।

रायपुर सीट की चुनावी दावेदारी पर लगा ब्रेक

आशुतोष नेगी देहरादून की रायपुर विधानसभा सीट पर लगातार जमीनी पकड़ मजबूत करने में लगे थे। सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने वाले आक्रामक चेहरे के रूप में उनकी पहचान रही है।

लेकिन अचानक हुए निष्कासन ने रायपुर क्षेत्र में क्षेत्रीय दल के चुनावी गणित को बुरी तरह उलझा दिया है। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता जहां इसे संगठन की गरिमा बचाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराजगी है।

1979 में राज्य आंदोलन की रीढ़ बनकर उभरी यह पार्टी फिलहाल संगठनात्मक बिखराव को साधने की चुनौती से जूझ रही है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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