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उत्तराखंड एमबीबीएस फर्जीवाड़ा, 370 संदिग्ध छात्रों की सूची स्वास्थ्य मंत्री के पास पहुंची

उत्तराखंड में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण-पत्र पर एमबीबीएस एडमिशन का मामला गहराया। एक्टिविस्ट ने 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची स्वास्थ्य मंत्री को सौंपी।

Published On: September 18, 2026 10:42 PM
Uttarakhand MBBS Fake Certificate Case

HIGHLIGHTS

  • एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा ने 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची सौंपी है।
  • देहरादून में पहले ही चार छात्रों के दाखिले रद्द किए जा चुके हैं।
  • कई छात्रों पर दूसरे राज्यों से परीक्षा देकर कोटे का लाभ लेने का आरोप है।
  • स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने पूरे मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।

दून हॉराइज़न, देहरादून (18 सितंबर) : उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश पाने का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब मामले का खुलासा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने सीधे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की एक लंबी सूची सौंप दी।

इस नई फेहरिस्त के सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह दायरा अब शुरुआती चार मामलों से कहीं आगे निकल चुका है।

शुरुआती जांच के दायरे से बाहर आकर यह मामला अब एक बड़े संगठित फर्जीवाड़े की शक्ल लेता दिख रहा है। एक्टिविस्ट का दावा है कि सूची में शामिल कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट (NEET) की प्रक्रिया किसी अन्य राज्य से पूरी की, लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड के मूल निवासी और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित होने के फर्जी प्रमाण-पत्र हासिल कर लिए। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में मिलने वाले इस विशेष आरक्षण का अनुचित लाभ उठाने के लिए तैयार किए गए इन दस्तावेजों की सत्यता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कार्रवाई और कानूनी शिकंजे की बात करें तो स्थानीय प्रशासन पहले ही इस दिशा में कुछ कदम उठा चुका है। जिला प्रशासन देहरादून की शुरुआती जांच के दौरान गंभीर विसंगतियां मिलने पर चार अभ्यर्थियों के आश्रित प्रमाण-पत्र निरस्त किए गए थे, जिसके बाद उनके दाखिले भी रद्द कर दिए गए थे।

इतना ही नहीं, इस फर्जीवाड़े में संलिप्तता के चलते चार छात्राओं सहित पांच लोगों के खिलाफ शहर के दो अलग-अलग थानों में मुकदमे भी दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस अब इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रही है कि आखिर ये कूटरचित दस्तावेज किस स्रोत से तैयार कराए गए थे और इस पूरे खेल में पर्दे के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।

पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इस स्थिति को बेहद गंभीर करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले के मामलों में जिलाधिकारी देहरादून को सख्त जांच के आदेश दिए गए थे, जो प्रक्रिया अभी भी गतिमान है।

साथ ही चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय को यह हिदायत दी गई है कि आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी भी स्तर पर दस्तावेजों में जरा भी संदेह पाया जाता है, तो बिना किसी देरी के त्वरित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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