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फीस भरने के लिए देहरादून के छात्र ने बेची किडनी, डॉक्टर दंपति समेत 6 गिरफ्तार

देहरादून में एमबीए कर रहे एक छात्र ने कॉलेज की फीस भरने के लिए अपनी किडनी बेच दी, लेकिन दलालों ने उसे तय रकम भी नहीं दी। कानपुर पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर दंपति सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जो बड़े अस्पतालों की मिलीभगत से यह काला कारोबार चला रहे थे।

फीस भरने के लिए देहरादून के छात्र ने बेची किडनी, डॉक्टर दंपति समेत 6 गिरफ्तार

HIGHLIGHTS

  • 9 लाख में किडनी का सौदा हुआ था, लेकिन छात्र के खाते में केवल 3.50 लाख रुपये ही डाले गए।
  • आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति सहित कुल 6 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
  • पीड़ित छात्र बिहार के समस्तीपुर का निवासी है और पिता की आत्महत्या के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।

देहरादून, 01 अप्रैल (दून हॉराइज़न)। शहर में एक ऐसे सनसनीखेज किडनी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। देहरादून के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र आयुष कुमार ने अपनी पढ़ाई जारी रखने और कॉलेज की बकाया फीस भरने के लिए अपनी किडनी का सौदा कर लिया।

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बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला आयुष आर्थिक तंगी के चलते इस कदर मजबूर था कि उसने अपनी जान जोखिम में डालकर ऑपरेशन करवा लिया। लेकिन धोखेबाज़ों के इस गिरोह ने छात्र को भी नहीं बख्शा और तय रकम का आधा हिस्सा भी नहीं दिया।

आयुष ने पुलिस को बताया कि उसके पिता की आत्महत्या के बाद घर की जिम्मेदारी और पढ़ाई का बोझ उसी के कंधों पर था। जब उसे कहीं से एजुकेशन लोन नहीं मिला, तो वह करीब पांच-छह महीने पहले टेलीग्राम पर एक ‘किडनी डोनर ग्रुप’ से जुड़ा। यहीं से उसकी मुलाकात डॉक्टर अफजल और डॉक्टर वैभव से हुई, जो उसे बहला-फुसलाकर कानपुर ले आए।

पुलिस के मुताबिक, छात्र की किडनी का सौदा 9 लाख रुपये में तय हुआ था। ऑपरेशन के बाद आरोपियों ने अपनी नीयत बदल ली और उसे केवल 6 लाख रुपये देने की बात कही। हद तो तब हो गई जब छात्र के बैंक खाते में महज 3.50 लाख रुपये ही ट्रांसफर किए गए। बकाया पैसों की मांग करने पर उसे धमकाया गया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

कानपुर डीसीपी वेस्ट जोन एसएम कासिम आबिदी ने इस गिरोह के नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया कि आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा समेत पांच डॉक्टरों और एक दलाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस काले धंधे के तार लखनऊ और नोएडा के बड़े अस्पतालों से जुड़े हुए हैं। जब भी कोई केस बिगड़ता था, तो मरीजों को गुपचुप तरीके से इन बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था।

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इस मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच के दौरान छात्र आयुष के साइबर अपराध में संलिप्त होने के साक्ष्य मिले। एसीपी आशुतोष कुमार ने बताया कि आयुष ने कई ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी खाते) बनवाए थे, जिसका इस्तेमाल अवैध ट्रांजेक्शन के लिए होता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि अपराधियों के साथ उसकी साठगांठ कितनी गहरी है। फिलहाल दो और डॉक्टरों समेत चार अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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