दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दैनिक भागदौड़ के बीच सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) का आधिकारिक ‘सारथी ऐप’ (Saarthi App) एक अनिवार्य डिजिटल जरूरत बन चुका है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक इस प्लेटफॉर्म ने 1 करोड़ से अधिक डाउनलोड का बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। कार्यदिवसों पर रोजाना करीब 8.2 लाख बार इस ऐप को खोला जा रहा है, जबकि महीने भर में इसके व्यूज की संख्या 20 लाख के पार पहुंच चुकी है।
साफ है, टोकन वेंडिंग मशीनों और टिकट काउंटरों के बाहर लगने वाली लंबी कतारों से अब एनसीआर की जनता पूरी तरह डिजिटल टिकटिंग की ओर शिफ्ट हो रही है।
सिर्फ मेट्रो नहीं, एनसीआर का हर सार्वजनिक साधन एक मंच पर
यात्रियों को हर परिवहन सेवा के लिए अलग-अलग एप्लिकेशन डाउनलोड करने की झंझट न झेलनी पड़े, इसी सोच के साथ कॉरपोरेशन ने इसे मल्टी-मॉडल हब का रूप दिया है। ऐप के जरिए डीटीसी (DTC) की साधारण व एसी बसें, दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर दौड़ने वाली ‘नमो भारत’ ट्रेन और नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो (NMRC) का सफर एक ही विंडो से बुक किया जा सकता है। इसके अलावा भारतीय रेल के लिए आईआरसीटीसी लिंक और लंबी दूरी की अंतरराज्यीय बसों की बुकिंग भी यहीं उपलब्ध कराई गई है।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी के मद्देनजर ऐप में मेट्रो पार्किंग का रियल-टाइम स्टेटस, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग पॉइंट्स और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों की सटीक लोकेशन भी मैप की गई है। पहली और आखिरी ट्रेन का शेड्यूल देखना हो या स्टेशनों पर मौजूद लिफ्ट-एस्केलेटर की स्थिति, सब कुछ एक क्लिक पर सामने आ जाता है।
मोबाइल रिचार्ज से लेकर ग्रॉसरी और दवाओं का ऑर्डर
परिवहन से इतर यह ऐप धीरे-धीरे एक ‘सुपर ऐप’ के ढांचे में ढल रहा है। मुसाफिर अब मेट्रो कोच में सफर करते हुए अपने घर के बिजली-पानी के बिल चुका सकते हैं, मोबाइल या फास्टटैग रिचार्ज कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर जरूरी दवाइयां भी सीधे ऑर्डर कर सकते हैं।
वर्चुअल स्मार्ट कार्ड (Virtual Smart Card) की सुविधा मिलने से प्लास्टिक कार्ड खोने या घर भूल जाने का डर भी खत्म हो गया है। सीधे फोन स्क्रीन से क्यूआर कोड स्कैन किया और ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन (AFC) गेट पार।
विंटर ऐक्शन प्लान: ग्रैप और प्रदूषण से मुकाबले में अहम भूमिका

दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर शुरू होते ही हवा में धुंध और ठंड का असर गहराने लगता है। सर्दियों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) जब ‘गंभीर’ श्रेणी की ओर बढ़ता है, तब प्रशासन को ग्रैप (GRAP) पाबंदियां लागू करनी पड़ती हैं। निजी वाहनों को सड़कों से हटाने और लोगों को मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की तरफ मोड़ने के लिए डीएमआरसी इसी ऐप को मुख्य जरिया बनाने जा रही है।
भीड़भाड़ वाले स्टेशनों-खासकर राजीव चौक, कश्मीरी गेट, नई दिल्ली और बॉटनिकल गार्डन-पर भीड़ नियंत्रण के लिए डिजिटल टिकटिंग का यह मॉडल आने वाले हफ्तों में सबसे बड़ा सहारा साबित होगा।









