मुंबई, 4 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। सत्तर और अस्सी के दशक में अपनी बोल्डनेस और खूबसूरती से सिल्वर स्क्रीन पर आग लगाने वाली परवीन बॉबी (Bollywood Mystery) का अंत इतना खौफनाक होगा, इसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी।
जुहू के ‘रिवेरा’ अपार्टमेंट के उस बंद कमरे की दीवारें आज भी उस सन्नाटे की गवाह हैं, जहां हिंदी सिनेमा की यह सबसे महंगी अभिनेत्री लावारिस हालत में मौत की आगोश में सो गई थी।
परवीन बॉबी की लाश जब उनके फ्लैट से मिली, तो वह इस कदर सड़ चुकी थी कि उसकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा था। पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा, तो कमरे का मंजर देखकर अनुभवी अफसरों के भी पसीने छूट गए थे।
बिस्तर पर पड़ा उनका पार्थिव शरीर पूरी तरह गल चुका था, क्योंकि उनकी मौत के करीब 72 घंटे बाद दुनिया को इसकी खबर मिली थी। दरअसल, परवीन बॉबी लंबे समय से ‘पैरानॉयड शिजोफ्रेनिया’ नाम की मानसिक बीमारी से लड़ रही थीं।
उन्हें लगने लगा था कि पूरी दुनिया और फिल्म इंडस्ट्री के बड़े दिग्गज उन्हें जान से मारना चाहते हैं। इसी खौफ के चलते उन्होंने अपने फ्लैट को ही अपनी कैद बना लिया था। वह किसी से मिलती नहीं थीं और फोन उठाना भी बंद कर दिया था।
जांच में यह बात सामने आई कि परवीन को डायबिटीज भी थी और उनके पैर में ‘गैंग्रीन’ हो गया था। इस बीमारी की वजह से उनके पैर का मांस गलने लगा था और वह हिलने-डुलने में असमर्थ थीं।

उनकी रसोई में कुछ नहीं था, सिवाय शराब की खाली बोतलों और दवाइयों के। रिपोर्ट के मुताबिक, भूख और बीमारी के उस जानलेवा गठजोड़ ने उनकी जान ले ली।
उनकी मौत का खुलासा तब हुआ जब उनके घर के दरवाजे पर दूध के पैकेट और अखबारों का ढेर लग गया। सोसाइटी के वॉचमैन ने पुलिस को सूचना दी।
जब पुलिस अंदर दाखिल हुई, तो वहां न कोई सुसाइड नोट मिला और न ही किसी साजिश के सबूत। वहां सिर्फ बिखरा हुआ सामान और एक ऐसी सुपरस्टार की यादें थीं, जिसे वक्त ने जीते जी भुला दिया था।
परवीन बॉबी ने ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘नमक हलाल’ और ‘दीवार’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी थीं। वह पहली भारतीय अभिनेत्री थीं, जो प्रतिष्ठित ‘टाइम मैगजीन’ के कवर पेज पर छपी थीं।
लेकिन शोहरत के उस ऊंचे शिखर से गिरकर गुमनामी के अंधेरे में दम तोड़ना, बॉलीवुड के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है।










