home ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम मनोरंजन बिजनेस ऑटो गैजेट्स खेल हेल्थ लाइफस्टाइल धर्म राशिफल लव राशिफल अंक राशिफल पंचांग करियर ट्रेंडिंग वीडियो

मां की कमाई का हवाला देकर पिता बच्चे के खर्चे से नहीं बच सकता: उत्तराखंड हाई कोर्ट

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माता-पिता दोनों के कामकाजी होने की स्थिति में भी पिता अपने बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि कर्ज का भुगतान या अन्य पारिवारिक दायित्व बच्चे के कानूनी हक से ऊपर नहीं हैं।

मां की कमाई का हवाला देकर पिता बच्चे के खर्चे से नहीं बच सकता: उत्तराखंड हाई कोर्ट

HIGHLIGHTS

  • कानूनी अनिवार्यता: मां की आय चाहे जितनी भी हो, पिता का वैधानिक दायित्व खत्म नहीं होता।
  • प्राथमिकता: पिता के व्यक्तिगत कर्ज या स्वैच्छिक खर्चों को बच्चे के भरण-पोषण पर वरीयता नहीं दी जा सकती।
  • जीवन स्तर: बच्चा अपने माता-पिता के सामाजिक और आर्थिक स्तर के अनुरूप जीवन जीने का हकदार है।

नैनीताल, 22 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए कहा है कि यदि मां कामकाजी है और अच्छा कमा रही है, तो भी पिता अपने नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण के कर्तव्य से बच नहीं सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता अपनी वित्तीय देनदारियों या ऋणों का हवाला देकर बच्चे को मिलने वाली वित्तीय सहायता से इनकार नहीं कर सकता है।

जस्टिस आशीष नैथानी की एकल पीठ ने रुड़की फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक पिता को अपने बच्चे के लिए ₹8000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 सामाजिक न्याय का एक माध्यम है, जिसका मुख्य उद्देश्य आश्रितों को निराश्रय होने से बचाना है।

दोनों सरकारी सेवा में, फिर भी पिता पर जिम्मेदारी

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, बच्चे के माता और पिता दोनों ही केंद्रीय सुरक्षा बलों में कार्यरत हैं। पिता केंद्रीय रिजर्व प्रेम बल (CRPF) में है, जबकि मां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में तैनात है। पिता ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि चूंकि मां की आय स्थिर है, इसलिए बच्चे के भरण-पोषण का पूरा वित्तीय बोझ उन पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने अपने ऊपर बैंक कर्ज और अपने माता-पिता व भाई-बहनों की जिम्मेदारी का भी हवाला दिया था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: बच्चा समान जीवन स्तर का हकदार

हाई कोर्ट ने पिता की इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कर्ज का भुगतान या परिवार के अन्य सदस्यों की सहायता जैसे दायित्व ‘स्वैच्छिक’ श्रेणी में आते हैं। अदालत ने कहा कि इन कारणों को बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार के आड़े नहीं आने दिया जा सकता। बेंच ने जोर देकर कहा कि बच्चे को उसी जीवन स्तर को बनाए रखने का पूरा हक है, जैसा उसके माता-पिता का है।

अदालत ने माना कि हालांकि मां की आय एक कारक हो सकती है, लेकिन यह पिता को उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं करती। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए निर्देश दिया कि पिता को आवेदन दाखिल करने की तिथि से ही निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।


देश और दुनिया की ताज़ा ख़बरों (Latest Hindi News) के लिए जुड़े रहें Doon Horizon के साथ। राजनीति (Politics), खेल, मनोरंजन, टेक्नोलॉजी और एजुकेशन से जुड़े हर लाइव अपडेट (Live Updates) और ब्रेकिंग न्यूज़ (Breaking News in Hindi) सबसे पहले पाएं। पढ़िए आपके काम की हर बड़ी खबर, सिर्फ एक क्लिक पर।


Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Leave a Comment