देहरादून (03 अक्टूबर): उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार से लेकर मौजूदा धामी सरकार तक चले साढ़े नौ साल के कार्यकाल के बाद अब सरहदी जिलों का रुख करने की सरकारी कवायद पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस हमलावर हो गया है।
राज्य के सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदेश मंत्रिमंडल (Uttarakhand Cabinet) की बैठकें आयोजित कराने की प्रशासनिक तैयारियों को कांग्रेस ने विशुद्ध रूप से आगामी 2027 विधानसभा चुनाव का ‘फोटो-ऑप’ करार दिया। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने दो-टूक कहा कि सीमांत क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व की रीढ़ हैं, इन्हें केवल चुनावी पर्यटन का अखाड़ा नहीं बनाया जा सकता।
दसौनी ने सवाल दागा कि जब चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ की गर्भवती महिलाओं तथा बुजुर्गों को सड़क विहीन इलाकों से दांडी-कंडी के सहारे मीलों पैदल चलकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा था, तब शासन कहां सोया हुआ था?
भुतहा होते गांव और पलायन आयोग की रिपोर्ट पर सवाल
पहाड़ी ढलानों पर खाली होते घर महज आंकड़ों का खेल नहीं हैं। दसौनी के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संपर्क मार्ग और मोबाइल कनेक्टिविटी के अभाव में सीमांत गांवों का ‘घोस्ट विलेज’ (Ghost Villages) में तब्दील होना सीधे तौर पर देश की सीमा सुरक्षा से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि सीमा तब मजबूत होती है जब वहां स्थानीय नागरिक डटे रहें, न कि तब जब राजधानी का अमला कुछ घंटों के लिए वहां टेंट लगाकर फैसले लेने का दिखावा करे। वन्यजीवों के लगातार बढ़ते हमलों से ग्रामीण खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन के नाम पर केवल फाइलों का पेट भरा गया।
108 सीमांत गांवों के ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ की मांगी रिपोर्ट

कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रशासनिक दावों की कलई खोलते हुए जनवरी 2026 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और राज्य स्वास्थ्य महकमे के बीच हुए साझा समझौते का ब्योरा सामने रखा। उन्होंने पूछा कि पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के 108 संवेदनशील सीमांत गांवों में प्राथमिक उपचार तंत्र बहाल करने के लिए शुरू किए गए ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ का जमीनी सच क्या है? कागजों पर बनी इस योजना के तहत कितने ग्रामीणों को टेली-मेडिसिन या मौके पर दवाएं मयस्सर हुईं, सरकार इसकी वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाए।
कैबिनेट से पहले जन-सुनवाई और श्वेत पत्र की मांग
गरिमा दसौनी ने सरकार के सम्मुख पांच सीधे सवाल रखते हुए मांग की कि सीमांत जिलों में गाड़ी का काफिला उतारने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वहां जन-सुनवाई (Public Hearing) करवाएं। इसके अलावा पिछले साढ़े नौ वर्षों में सीमांत विकास के नाम पर घोषित पैकेजों पर श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि बैठक के बाद हर जिले के लिए तय समयसीमा वाली एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी नहीं की जाती, तो जनता इस सियासी कवायद को महज वोट बैंक बटोरने का हथकंडा मानेगी।









