ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

Ganesh Chaturthi Chandra Darshan : गणेश चतुर्थी की रात चांद देखने से क्यों लगता है मिथ्या दोष? जानें क्या कहता है शास्त्र

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Mon, 14 Sep 2026 07:38 PM IST

गणेश चतुर्थी की रात चांद देखने की सख्त मनाही होती है क्योंकि मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठे आरोप या कलंक लगने का खतरा रहता है। इस परंपरा के पीछे भगवान गणेश द्वारा चंद्रदेव को दिए गए शाप और श्रीकृष्ण की स्यमंतक मणि से जुड़ी पौराणिक कथाएं हैं।

Ganesh Chaturthi Chandra Darshan

Ganesh Chaturthi Chandra Darshan : गणेश चतुर्थी का दिन घर-घर बप्पा के स्वागत और उल्लास का पर्व होता है। लोग भक्ति भाव से गणपति की स्थापना करते हैं और मोदक का भोग लगाते हैं। इस पावन अवसर की रात एक खास नियम का पालन बेहद कड़ाई से किया जाता है—चांद न देखना।

धार्मिक मान्यताओं में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस चतुर्थी को ‘कलंक चतुर्थी’ या ‘कलंक चौथ’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात आकाश में चमकते चंद्रमा को देखने से व्यक्ति को समाज में अकारण बदनामी और झूठे लांछनों का सामना करना पड़ता है।

जब चंद्रदेव के अहंकार पर गणेश जी हुए रुष्ट

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश मोदक लेकर मूषक पर सवार होकर अपने धाम की ओर जा रहे थे। रास्ते में अचानक मूषक का संतुलन बिगड़ा और गणपति फिसल कर गिर पड़े।

ऊपर आकाश से चंद्रदेव यह दृश्य देख रहे थे। अपने रूप और तेज के अभिमान में चूर होकर वे जोर-जोर से हंसने लगे। चंद्रदेव का यह उपहास गणपति को अपना अपमान लगा। रुष्ट होकर गणेश जी ने उन्हें तुरंत शाप दे दिया कि उनका सारा रूप और सौंदर्य नष्ट हो जाएगा और वे निरंतर क्षीण होते जाएंगे।

शाप का प्रभाव और 15 दिनों का चक्र

शाप के प्रभाव से चंद्रदेव का तेज तेजी से घटने लगा। भयभीत होकर वे अपनी भूल सुधारने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे और कठिन तपस्या की।

शिव जी की मध्यस्थता के बाद चंद्रदेव ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी। गणपति ने शाप को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उसमें राहत दी। उन्होंने कहा कि चंद्रमा एक पखवाड़े (15 दिन) तक घटेंगे और फिर अगले 15 दिन अपने पूर्ण रूप में वापस आएंगे।

इसी व्यवस्था के तहत गणेश जी ने यह नियम तय किया कि सामान्य दिनों में चंद्र दर्शन शुभ रहेगा, लेकिन जिस भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रदेव ने उपहास उड़ाया था, उस दिन उनके दर्शन करने वाले को मिथ्या दोष (झूठा कलंक) लगेगा।

श्रीकृष्ण और स्यमंतक मणि का प्रसंग

इस मान्यता का उल्लेख द्वापर युग की एक प्रसिद्ध कथा में भी मिलता है। कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण से भी अनजाने में भाद्रपद की चतुर्थी तिथि को जल में चंद्रमा का प्रतिबिंब दिख गया था।

इसके कुछ ही समय बाद उन पर स्यमंतक मणि चुराने और प्रसेनजीत की हत्या का झूठा आरोप लग गया। हालांकि बाद में श्रीकृष्ण ने जामवंत जी से युद्ध कर मणि प्राप्त की और अपनी बेगुनाही साबित की, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि इस तिथि के दोष से स्वयं भगवान भी अछूते नहीं रहे।

गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?

यदि अनजाने में या लापरवाही से इस रात चंद्रमा दिख जाए, तो शास्त्रों में इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं:

  • स्यमंतक मणि से जुड़े मंत्र का जाप करें या उसकी पौराणिक कथा का पाठ करें।
  • भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें 21 दूर्वा अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें।
  • किसी जरूरतमंद को फल या अन्न का दान करें।

धार्मिक मर्यादाओं का यह नियम हमें सिखाता है कि किसी के रूप या परिस्थिति का उपहास नहीं उड़ाना चाहिए। यही संदेश ‘कलंक चतुर्थी’ की परंपरा को आज भी जीवंत बनाए हुए है।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

Leave a Comment