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Haridwar Land Scam : IAS Varun Chaudhary की बर्खास्तगी तय, पूर्व DM कमेंद्र सिंह पर भी गिरेगी गाज

हरिद्वार के सराय डंपिंग यार्ड घोटाले में राज्य सरकार ने IAS वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की संस्तुति कर दी है। तत्कालीन DM कमेंद्र सिंह के खिलाफ 'मेजर पनिशमेंट' की तैयारी है और 10 लोगों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

Haridwar Land Scam : IAS Varun Chaudhary की बर्खास्तगी तय, पूर्व DM कमेंद्र सिंह पर भी गिरेगी गाज

HIGHLIGHTS

  • IAS वरुण चौधरी की बर्खास्तगी की शासन से संस्तुति।
  • तत्कालीन DM कमेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई।
  • हरिद्वार एसडीएम अजयवीर सिंह की तीन वेतन वृद्धियां रुकीं।
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 10 पर केस दर्ज।

Haridwar Land Scam : 15 करोड़ की जमीन को 54 करोड़ में खरीदकर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले आईएएस वरुण चौधरी की शासन से छुट्टी तय हो गई है। राज्य सरकार ने 2017 बैच के इस अधिकारी को बर्खास्त करने की संस्तुति कर दी है। 21 नवंबर 2023 तक वरुण चौधरी हरिद्वार में नगर मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे और इसी दौरान घोटाले की पटकथा लिखी गई।

कार्रवाई के रडार पर सिर्फ पूर्व नगर आयुक्त चौधरी नहीं हैं। हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी कमेंद्र सिंह के खिलाफ भी ‘मेजर पनिशमेंट’ की कार्रवाई पर मुहर लग चुकी है। शासन स्तर पर कमेंद्र सिंह की बर्खास्तगी को लेकर भी तलवार लटक रही है।

तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज की गई है। सरकार ने उनकी तीन वेतन वृद्धियां तत्काल प्रभाव से रोक दी हैं। राज्य सतर्कता समिति की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दे दी है।

धारा-143 का खेल और 54 करोड़ का टेंडर

सराय भूमि में कूड़ा डंपिंग यार्ड के लिए यह जमीन खरीदी जानी थी। 2.3070 हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए किसानों ने महज 15 करोड़ रुपये मांगे थे और इसी रकम के हिसाब से आवेदन किया था। प्रशासन के भीतर बैठे सिंडिकेट ने जमीन की कीमत रातों-रात 54 करोड़ रुपये पहुंचा दी।

दस्तावेजों की तफ्तीश में सबसे असाधारण टाइमलाइन सामने आई है। जिस दिन जमीन का धारा-143 के तहत कृषि से व्यावसायिक उपयोग में भू-परिवर्तन हुआ, ठीक उसी दिन नगर निगम ने 54 करोड़ रुपये में खरीद का एग्रीमेंट साइन कर लिया। इतनी जल्दबाजी में हुआ यह भुगतान जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सुबूत बना हुआ है।

बीते साल 3 जून 2025 को सीएम धामी ने इस मामले में कड़ा एक्शन लिया था। तत्कालीन डीएम, नगर आयुक्त और एसडीएम समेत सात लोगों को सस्पेंड कर दिया गया था। साल भर बाद भी शासन इस गुत्थी को सुलझा रहा है कि किसानों को 15 करोड़ की जमीन को 54 करोड़ का व्यावसायिक रूप देने का आइडिया किस स्तर से फीड किया गया था।

पूर्व DM गर्ब्याल ने नामंजूर की थी फाइल

जमीन खरीद की यह फाइल अचानक सामने नहीं आई थी। पूर्व जिलाधिकारी और नगर निगम के तत्कालीन प्रशासक धीरज सिंह गर्ब्याल के टेबल पर भी यही प्रस्ताव रखा गया था। गर्ब्याल ने मानकों की अनदेखी को भांपते हुए इस संदिग्ध सौदे को सिरे से खारिज कर दिया था।

अब भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपियों की धरपकड़ होगी। एफआईआर की लिस्ट में तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता और प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण शामिल हैं।

तत्कालीन संपत्ति लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश कांडपाल के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई होगी। जमीन बेचने वाले गुट में शामिल सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह पर भी पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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