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Almora District Hospital : अल्मोड़ा जिला अस्पताल में दो महीने से फिजिशियन नहीं, मरीज परेशान

अल्मोड़ा के पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में पिछले दो महीने से कोई फिजिशियन तैनात नहीं है, जिससे आम मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार पाण्डे ने राज्यपाल और शासन को पत्र लिखकर तत्काल डॉक्टर तैनात करने की मांग की है और कार्रवाई न होने पर जनआंदोलन की चेतावनी दी है।

Published On: August 22, 2026 12:58 PM
No Physician in Almora District Hospital for Two Months, Patients Suffer

HIGHLIGHTS

  • अल्मोड़ा जिला अस्पताल में 2 माह से फिजिशियन नहीं
  • अस्पताल में फिजिशियन के दोनों स्वीकृत पद खाली
  • मरीजों को 6 किमी दूर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा
  • डॉक्टर तैनाती न होने पर बड़े जनआंदोलन की चेतावनी

दून हॉराइज़न, अल्मोड़ा (22 अगस्त 2026): पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में पिछले करीब दो महीनों से कोई भी फिजिशियन चिकित्सक तैनात नहीं है। जिला मुख्यालय के सबसे प्रमुख अस्पताल में दोनों पद खाली पड़े होने के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, बुजुर्गों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को बिना परामर्श लौटना पड़ रहा है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार पाण्डे ने कड़ा रोष जताया है।

उन्होंने इस मामले में सीधे उत्तराखंड के राज्यपाल, मुख्य सचिव तथा महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. हरीश आर्य के स्थानांतरण के बाद से स्वास्थ्य महकमे ने यहां किसी नए चिकित्सक को नियुक्त नहीं किया है। प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही इस उदासीनता का सीधा खामियाजा रोज अस्पताल पहुंचने वाले सैकड़ों मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

संजय पाण्डे ने इस अव्यवस्था को लेकर अल्मोड़ा के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से भी व्यक्तिगत मुलाकात की थी। स्थानीय अफसरों के साथ हुई बैठक में अस्पताल के रिक्त पदों और ओपीडी में बिगड़ते हालात पर विस्तार से बात रखी गई थी। जिले के आला अधिकारियों के संज्ञान में पूरा मामला डालने के बाद भी धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

स्थानीय स्तर पर समाधान न निकलने के कारण अब इस मुद्दे को सीधे शासन स्तर पर उठाया गया है। फिजिशियन के अभाव में गंभीर और जटिल रोगों की जांच पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। सर्जिकल ऑपरेशन से पहले की आवश्यक चिकित्सकीय जांचें न हो पाने से ऑपरेशन की प्रक्रिया भी ठप पड़ी है।

इलाज के अभाव में मरीजों को लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित मेडिकल कॉलेज जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। वहां भी वर्तमान में मात्र एक फिजिशियन प्रोफेसर अशोक कुमार सेवाएं दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में पहले से ही मरीजों का भारी दबाव है, ऐसे में जिला अस्पताल से रेफर होकर आ रहे मरीजों के कारण स्थिति और अधिक अनियंत्रित हो गई है।

जिले के प्रमुख चिकित्सालय की इस बदहाली पर स्थानीय राजनीतिक दलों ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। पहले चौखुटिया प्रकरण के दौरान तमाम विपक्षी दल सड़कों पर मुखर नजर आए थे, लेकिन जिला मुख्यालय पर हजारों लोगों से जुड़े इस बुनियादी स्वास्थ्य संकट पर किसी भी पार्टी ने आवाज नहीं उठाई है। आम जनता के बीच यह सवाल खड़ा हो रहा है कि पर्वतीय इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राजनीतिक नेतृत्व की क्या प्राथमिकता है।

यह मामला किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि सीधे आम नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा विषय है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में योग्य और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराना शासन और स्वास्थ्य विभाग का बुनियादी दायित्व है।

संजय पाण्डे ने शासन से मांग की है कि रिक्त पड़े दोनों फिजिशियन पदों पर तुरंत स्थायी नियुक्ति की जाए। यदि स्थायी भर्ती प्रक्रिया में समय लग रहा है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के तहत फौरन डॉक्टरों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाए ताकि ऑपरेशन और ओपीडी सेवाएं सामान्य हो सकें। मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई है। शासन की ओर से त्वरित समाधान न मिलने की दशा में स्थानीय नागरिकों को एकजुट कर व्यापक स्तर पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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