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भारत में विदेशी शराब अब 15% तक सस्ती, 600 रुपये तक सस्ती हुई बोतल

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में 10 से 15% की कमी दर्ज हुई है। यूपी और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ब्लैक लेबल और जेएंडबी के दाम घट गए हैं।

Published On: October 1, 2026 8:11 PM
scotch whisky price cut india

HIGHLIGHTS

  • जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल 450 रुपये सस्ती होकर 3800 रुपये पर पहुंची।
  • यूके से आने वाली स्कॉच पर आयात शुल्क 150 से घटकर 75% हुआ।
  • उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गोवा में नई दरें प्रभावी।
  • आयातित शराब की कीमतें आधी न होने की वजह राज्य आबकारी कर।
  • देसी सिंगल माल्ट ब्रांड्स त्योहारी सीजन के बाद तय करेंगे अपनी रणनीति।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (1 अक्टूबर) : भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (India-UK Free Trade Agreement) पर अमल शुरू होते ही घरेलू शराब बाजार में हलचल तेज हो गई है। विदेशी शराब के शौकीनों के लिए राहत भरी खबर यह है कि डियाजियो (Diageo) और पेरनोड रिकार्ड (Pernod Ricard) जैसी दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने सीमा शुल्क में मिली कटौती का सीधा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाना शुरू कर दिया है।

इसके चलते देश के चुनिंदा प्रमुख बाजारों में बॉटल्ड-इन-ओरिजिन यानी सीधे यूके में पैक होकर आने वाली स्कॉच की खुदरा कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

तय समझौते के तहत ब्रिटेन से भारत आने वाली स्कॉच पर लगने वाले बेसिक कस्टम्स टैरिफ को 150 प्रतिशत से घटाकर सीधे 75 प्रतिशत कर दिया गया है। अगले एक दशक के दौरान इसे चरणबद्ध तरीके से 40 फीसदी तक लाने की रूपरेखा है।

खुदरा दुकानों पर दिखने लगा असर, घटे रेट

रियायती दरों का असर खुदरा स्तर पर साफ नजर आने लगा है। बाजार सूत्रों के मुताबिक, डियाजियो की सबसे लोकप्रिय 750 एमएल जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल (Johnnie Walker Black Label) की कीमत 4,250 रुपये से घटकर अब करीब 3,800 रुपये रह गई है।

वहीं, जेएंडबी (J&B) की बोतल अब 2,300 रुपये के मुकाबले 1,700 रुपये में उपलब्ध हो रही है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गोवा जैसे प्रमुख उपभोग वाले राज्यों में स्थानीय आबकारी विभागों से मंजूरी मिलने के बाद नई मूल्य सूचियां लागू कर दी गई हैं।

पेरनोड रिकार्ड ने भी अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो—जिसमें चिवास रीगल (Chivas Regal), बैलेंटाइन और द ग्लेनलि्वेट शामिल हैं—के दाम घटाने के लिए राज्य सरकारों को संशोधित मूल्य प्रस्ताव सौंपे हैं।

टैरिफ आधा, फिर भी खुदरा कीमतें आधी क्यों नहीं?

अक्सर सवाल उठता है कि अगर आयात शुल्क 150 फीसदी से घटकर 75 फीसदी हो गया, तो शराब की बोतलें 50 फीसदी सस्ती क्यों नहीं हुईं? इसका सीधा जवाब शराब पर लगने वाला जटिल टैक्स ढांचा है।

आयात शुल्क कुल लागत का केवल एक हिस्सा भर होता है। भारत में शराब पर सबसे बड़ा हिस्सा राज्यों की अपनी एक्साइज ड्यूटी, स्थानीय वैट, डिस्ट्रीब्यूटर मार्जिन और रिटेल वेंडर फीस का होता है।

चूंकि शराब संविधान की राज्य सूची का विषय है, इसलिए हर प्रदेश का टैक्स ढांचा बिल्कुल अलग होता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्तर पर डियाजियो ने औसतन 7 से 9 प्रतिशत कटौती का आकलन किया था, लेकिन राज्यों की आबकारी नीतियों और वाणिज्यिक फैसलों के चलते कुछ जगहों पर यह राहत 15 फीसदी तक पहुंच गई।

भारतीय सिंगल माल्ट पर दबाव, त्योहारी सीजन के बाद फैसला

आयातित स्कॉच के दाम टूटने से घरेलू प्रीमियम व्हिस्की श्रेणी, खासतौर पर भारतीय सिंगल माल्ट (Indian Single Malt) के सामने कड़ा मुकाबला खड़ा हो गया है। हाल के वर्षों में अमृत (Amrut), पॉल जॉन (Paul John) और रामपुर (Rampur) जैसे देसी ब्रांड्स ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत साख बनाई है।

अमृत डिस्टिलरीज के प्रमुख रक्षित जगदाले के अनुसार, नई बाजार परिस्थितियों के बीच कीमतों में समायोजन पर विचार जरूर हो रहा है, मगर कोई भी कदम उठाने से पहले त्योहारी तिमाही के बिक्री आंकड़ों का इंतजार किया जाएगा।

आने वाले महीनों में जब हरियाणा और दिल्ली जैसे अन्य बड़े शराब बाजारों में नई दरें प्रभावी होंगी, तब प्रीमियम सेगमेंट में यह प्रतिस्पर्धा और तीखी होना तय है।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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