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त्योहारी सीजन में जेब पर दोहरी मार, LPG सिलेंडर के साथ अब हवाई सफर भी हुआ महंगा

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Parul Sharma Updated Thu, 01 Oct 2026 03:32 PM IST

त्योहारी सीजन में एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ना तय है, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने जेट फ्यूल के दाम में 16 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है।

ATF prices increased

मुख्य बातें

  • घरेलू उड़ानों के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के दाम 121 से बढ़कर 137 रुपये हुए।
  • बीते 3 महीनों में जेट फ्यूल कुल मिलाकर 27 रुपये प्रति लीटर से अधिक महंगा हुआ।
  • एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च (Operating Cost) में अकेले ईंधन की हिस्सेदारी 40% तक होती है।
  • 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 62.59 रुपये की ताजा बढ़ोतरी दर्ज।
  • 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के भाव में कोई फेरबदल नहीं।

दून हॉराइज़न, नई दिल्ली (01 अक्टूबर) : त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही अगर आप छुट्टियों में हवाई सफर की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा का बजट बढ़ना तय मानिए।

सरकारी तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने घरेलू एयरलाइंस के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी जेट फ्यूल (ATF) की दरों में प्रति लीटर 16 रुपये का तेज इजाफा किया है। नई दरों के प्रभावी होने के बाद अब राजधानी में जेट फ्यूल की कीमत 121 रुपये से उछलकर सीधे 137 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर जा पहुंची है। यह एकमुश्त 13 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़त है।

90 दिनों में 25 फीसदी तक चढ़ चुके हैं एविएशन फ्यूल के भाव

हवाई ईंधन की कीमतों में यह कोई इकलौती बढ़ोतरी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल के मद्देनजर पिछले तीन महीनों से लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

अगस्त में जहां ATF के भाव में 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी, वहीं सितंबर में भी 6.28 रुपये प्रति लीटर (करीब 5.46 फीसदी) का इजाफा हुआ था। यानी महज 90 दिनों के भीतर एयरलाइंस के लिए ईंधन 27 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा महंगा हो चुका है, जो सीधे तौर पर 25 फीसदी की लागत वृद्धि दर्शाता है।

किसी भी विमानन कंपनी के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन का होता है। स्वाभाविक है कि जब संचालन लागत इतनी तेजी से बढ़ेगी, तो एयरलाइंस इसका बड़ा बोझ बेस फेयर और ‘फ्यूल सरचार्ज’ बढ़ाकर सीधे यात्रियों की जेब पर ही डालेंगी।

कमर्शियल सिलेंडर महंगा, रेस्टोरेंट कारोबारियों की बढ़ी चिंता

ईंधन कंपनियों ने सिर्फ हवाई ईंधन ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी दरें बढ़ाई हैं। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत में 62.59 रुपये प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है।

जुलाई में 183.50 रुपये और अगस्त में 192 रुपये की राहत मिलने के बाद यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल गैस महंगी हुई है; सितंबर में भी इसमें 9.50 रुपये की मामूली बढ़त हुई थी। इससे पहले वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों के चलते फरवरी से जून के बीच 19 किलो वाला सिलेंडर 1,740.50 रुपये से उछलकर 3,113.50 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए लागत बढ़ने से बाहर खाना-पीना भी थोड़ा महंगा हो सकता है।

आम जनता को राहत 

हवाई यात्रियों और कारोबारियों को झटका लगने के बीच आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू कुकिंग गैस सिलेंडर की कीमत में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। राजधानी में यह सिलेंडर पहले की तरह 942 रुपये पर ही मिलता रहेगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते मार्च से जून के दौरान घरेलू सिलेंडर में 89 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी। इसी तरह मई में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में भी कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।

चूंकि राज्य स्तर पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) और माल ढुलाई शुल्क अलग-अलग लागू होते हैं, इसलिए प्रत्येक राज्य के प्रमुख हवाई अड्डों और शहरों में ATF तथा एलपीजी की अंतिम खुदरा दरों में अंतर देखने को मिलेगा।

Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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