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बिना वैध दस्तावेज वोटर बनाने की मांग देशद्रोह जैसी, महेंद्र भट्ट का कांग्रेस पर तीखा हमला

उत्तराखंड में एसआईआर और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने बिना वैध कागजात वोटर बनाने की मांग को बेहद गंभीर बताया।

Uttarakhand voter list controversy

HIGHLIGHTS

  • महेंद्र भट्ट ने एसआईआर रोकने की मांग को विपक्षी दलों की हताशा बताया।
  • बिना प्रमाणित दस्तावेजों के मतदाता सूची में नाम जोड़ने की मांग पर उठाए सवाल।
  • चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के विपक्षी प्रदर्शन को करार दिया पाखंड।
  • 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष को तीसरी बार हार मिलने का किया दावा।

दून हॉराइज़न, देहरादून (01 अक्टूबर) : उत्तराखंड की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने विपक्षी दलों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया रोकने और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने के आह्वान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जनता का भरोसा खो चुके दल अब लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं की साख गिराने की कोशिश कर रहे हैं।

डेमोग्राफी और मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल

प्रदेश भाजपा मुख्यालय में मीडिया प्रभारी मानवीर सिंह चौहान के हवाले से जारी रुख को विस्तार देते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्षी दलों की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए। भट्ट का कहना था कि राज्य में मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना निर्वाचन प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी दल चाहते हैं कि बिना वैध कागजातों के लोगों को मतदाता बनाया जाए?

पर्वतीय राज्य की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देवभूमि की डेमोग्राफी से किसी भी तरह का समझौता नहीं हो सकता। यदि कोई समूह या दल बिना समुचित सत्यापन के अवैध व्यक्तियों और घुसपैठियों को मतदाता बनाकर सत्ता हासिल करने की राह देख रहा है, तो ऐसी हरकत लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ और देशद्रोह जैसी है।

चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता

महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के पुराने इतिहास का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि छह दशकों तक केंद्र की सत्ता में रहने के दौरान चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं की स्वतंत्रता को दबाने का काम किया गया था। आपातकाल के दौर की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि आज जब केंद्र सरकार ने चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) की नियुक्ति को एक तय कानून और पारदर्शी व्यवस्था के दायरे में ला खड़ा किया है, तब विपक्ष को हर प्रक्रिया में खोट नजर आ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब निष्पक्ष प्रणाली से चुनाव होते हैं और विपक्ष को अपनी हार तय दिखती है, तो वे ईवीएम, चुनाव आयोग और अदालतों जैसी संस्थाओं पर लांछन लगाने लगते हैं।

2027 के चुनावी दंगल पर नजर

राज्य में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की ओर इशारा करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जनता विपक्ष के इस दोहरे चरित्र को बखूबी समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जनता की अदालत में लगातार मात खाने के बाद अब नकारात्मक राजनीति का सहारा लिया जा रहा है। भट्ट ने भरोसा जताया कि भ्रामक बयानों के बावजूद प्रदेश का मतदाता विकास और पारदर्शिता के साथ खड़ा रहेगा और अगले चुनावों में भी विपक्ष को लगातार तीसरी बार करारी शिकस्त का सामना करना पड़ेगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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