चंडीगढ़, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। हरियाणा सरकार ने सूबे को एचआईवी/एड्स के साये से बाहर निकालने के लिए अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की कप्तानी में हुई हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (HSACS) की 23वीं बैठक में बीमारी की कमर तोड़ने के लिए न केवल खजाना खोला गया, बल्कि जांच के नियमों में भी क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब लड़ाई केवल संक्रमितों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘शून्य संक्रमण’ के लक्ष्य को पाने के लिए परिवार के स्तर पर कड़ाई बरती जाएगी। इसके तहत प्रदेश की प्रत्येक गर्भवती महिला के साथ-साथ उनके जीवनसाथी (पति) की भी एचआईवी और सिफलिस की संयुक्त जांच कराना अब अनिवार्य होगा। सरकार का सीधा लक्ष्य ‘मदर-टू-चाइल्ड’ ट्रांसमिशन को पूरी तरह खत्म करना है, जिसके लिए हर साल 12 लाख संयुक्त जांचों का भारी-भरकम लक्ष्य रखा गया है।
बजट का गणित: किस मोर्चे पर कितना खर्च?
वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 47.16 करोड़ रुपये के बजट को बेहद वैज्ञानिक ढंग से बांटा गया है। सबसे बड़ा हिस्सा यानी 16.45 करोड़ रुपये ‘टारगेटेड इंटरवेंशन’ के लिए रखे गए हैं, ताकि उन हाई-रिस्क ग्रुप्स तक पहुंचा जा सके जहां संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है। इसके अलावा जांच सेवाओं (ICTC) के लिए 10.90 करोड़ और उपचार व देखभाल (ART) के लिए 4.68 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पंचकूला को मिलेगी नई लैब, रिपोर्टिंग होगी सुपरफास्ट
मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए अब रोहतक PGI के चक्कर नहीं काटने होंगे। डॉ. सुमिता मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि पंचकूला में राज्य की दूसरी वायरल लोड लैब को एक महीने के भीतर ऑपरेशनल किया जाए। इसके साथ ही कैथल, हिसार, पानीपत और फरीदाबाद में आधुनिक CD4 मशीनें इंस्टॉल कर दी गई हैं। यह बुनियादी ढांचा न केवल जांच की रफ्तार बढ़ाएगा, बल्कि रिपोर्ट मिलने के समय (टर्नअराउंड टाइम) को भी न्यूनतम स्तर पर ले आएगा।

डिजिटल पहरा: छूट न जाए एक भी मरीज
इलाज बीच में छोड़ने वाले (Loss to Follow-up) मरीजों पर नकेल कसने के लिए एक सुरक्षित वेब-प्लेटफॉर्म को मंजूरी दी गई है। यह सिस्टम मरीजों को समय पर दवा लेने और क्लिनिक आने के लिए ऑटोमेटेड वॉइस मैसेज और एसएमएस अलर्ट भेजेगा। हरियाणा अब वैश्विक 95-95-99 लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, जिसमें 95% संक्रमितों की पहचान, 95% का इलाज और 99% मरीजों में वायरल लोड को पूरी तरह दबाने का संकल्प शामिल है।
इंडस्ट्रियल हब और कॉलेजों तक पहुंचेगी जंग
सरकार ने अब इस अभियान को अस्पतालों की चारदीवारी से बाहर निकाल दिया है। अब बड़े संस्थानों, फैक्ट्रियों और कॉर्पोरेट ऑफिसों में एचआईवी पॉलिसी लागू करना अनिवार्य होगा। गिग वर्कर्स (डिलीवरी पार्टनर्स आदि) की सेहत की निगरानी के साथ-साथ कॉलेजों में ‘रेड रिबन क्लब’ को फिर से सक्रिय किया जाएगा, ताकि युवाओं को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक कर इसे एक जन-आंदोलन बनाया जा सके।










